कसाब के वकील का झूठ बेनकाब, मुकदमे से हटाने की चेतावनी
यह विवाद तब पैदा हुआ जब विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने विशेष न्यायालय में आतंकी हमले से संबंधित 340 औपचारिक गवाहों की गवाही के लिए न्यायाधीश से अनुमति चाही।
ये गवाह पिछले आठ महीनों से चल रहे मुकदमे में अब तक निकम द्वारा पेश 271 गवाहों के अतिरिक्त हैं।
निकम ने आईएएनएस को बताया, "बहरहाल इन सभी की गवाही केवल उनके द्वारा पेश शपथपत्र से होगी और यह बचाव पक्ष के वकील पर निर्भर है कि वह उनको न्यायालय में बुलाना चाहता है या नहीं।"
निकम के शपथपत्र पेश करने पर काजमी ने उठकर कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी नहीं है।
निकम ने विशेष न्यायाधीश एम.एल.तहिलयानी को बताया कि शपथपत्र के माध्यम से गवाही के अपने इरादे के बारे में वह न केवल मुकदमे की सुनवाई के आरंभिक चरण में मई में ही कह चुके हैं, वरन 17 नवंबर को उन्होंने सभी 340 शपथपत्रों की प्रतियां काजमी को भेज दी।
इसके बाद न्यायाधीश तहिलयानी ने काजमी की अस्वीकृति को साफ झूठ करार दिया और कहा कि यह बात खुले न्यायालय में बचाव पक्ष के वकील के सामने हुई थी।
तहिलयानी ने काजमी से कहा, "आप कैसे इससे इंकार कर सकते हैं?"
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उसे पता नहीं था कि अभियोजक शपथपत्र के माध्यम से 340 लोगों की गवाही पेश करना चाहते हैं।
निकम ने कहा कि यदि काजमी बिना शर्त माफी मांगते हैं, तभी उनको मुकदमे में बने रहने देना चाहिए। अन्यथा न्यायालय इस मामले में निर्णय ले सकता है।
काजमी ने कहा कि यदि न्यायालय की ऐसी इच्छा है तो वह मामले से हटने को तैयार हैं।
तहिलयानी ने फैसले के लिए मामले को शुक्रवार तक सुरक्षित रख लिया।
यदि काजमी को हटाया गया तो कसाब के मामले से हटने वाले वे दूसरे वकील होंगे। इससे पहले अंजलि वाघमारे को भी विशेष न्यायालय ने बचाव पक्ष के वकील से हटा दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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