मुकेश अंबानी ने पक्षपातपूर्ण समझौते को 5 मिनट में दी थी मंजूरी : आरएनआरएल
प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष आरएनआरएल के वकील राम जेठमलानी ने यह भी कहा कि गैस समझौते पर 12 जनवरी 2006 को हस्ताक्षर किए गये, लेकिन आरएनआरएल का प्रबंधन इसके कई दिनों के बाद सात फरवरी को छोटे भाई अनिल अंबानी के पास आया।
आरएनआरएल की स्थापना 27 जनवरी 2006 को हुई थी और मुकेश अंबानी दोनों कंपनियों की ओर से फैसला लेते थे यद्यपि कंपनी में आरआईएल मात्र एक न्यासी थी। आरएनआरएल बाद में रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनी बन गई।
उन्होंने कहा, "बड़े भाई ने समझौते को एकतरफा तैयार किया और उसे दोनों पक्षों की ओर से मंजूरी दी। ऐसे में इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि समझौता मुकेश अंबानी के लिए उपयुक्त था।"
जेठमलानी ने कहा कि यही वे कारण थे जिसके चलते बंबई उच्च न्यायालय की एकल पीठ और खंडपीठ ने 12 जनवरी 2006 को हुए समझौते को अनुचित, अन्यायपूर्ण और बंटवारे की योजना का उल्लंघन करार दिया।
उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी समूह की एक कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे. पी. चलसानी ने भी 12 जनवरी 2006 को एक विस्तृत पत्र लिखा था जिसमें निदेशक मंडल के प्रस्ताव को गैरकानूनी और मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार बंटवारे की योजना के खिलाफ बताया था।
चलसानी 11 जनवरी को शाम 7.30 से 7.35 बजे तक चली निदेशक मंडल की बैठक में शामिल थे और आरआईएल के निदेशक मंडल द्वारा स्वीकार प्रस्ताव का उन्होंने विरोध किया था जिसपर अगले दिन हस्ताक्षर हुए और वह वास्तविक समझौता बना।
दरअसल, आरआईएल और आरएनआरआए के बीच गैस की कीमत, अवधि और मात्रा का समझौता 2005 में हुए पारिवारिक समझौते के तहत हुआ था लेकिन आरएलआई कहना है वह केवल 4.20 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से गैस की आपूर्ति कर सकती है क्योंकि सरकार ने यही दर तय की है। इस मामले में बंबई उच्च न्यायालय ने आरएलआरएल के पक्ष में फैसला दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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