मध्य प्रदेश में भू-ख्ांड आवंटन में प्राथमिकता की उपेक्षा पर मिलेगी सजा
प्राथमिकता सूची की उपेक्षा अपराध माना जाएगा और ऐसा करने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना या तीन साल की सजा अथवा दोनों दण्ड दिए जा सकते हैं।
प्रदेश के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने मंगलवार को विधानसभा में संशोधन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि सहकारी समितियों के सदस्यों को संरक्षण देने के लिए कुछ सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिससे दोषियों पर कार्रवाई हो सके।
समिति सदस्य को मांगी गई जानकारी नहीं देने वाले दोषी अधिकारी पर 50 हजार रुपये के दण्ड का प्रावधान किया गया है। स्ांशोधन प्रस्ताव के जरिए अब सहकारी समितियों की जांच के आदेश का अधिकार पंजीयक के साथ कलेक्टर को भी दिया गया है।
सहकारिता मंत्री ने माना कि गृह निर्माण सहकारी समितियों में हो रही गड़बड़ियों की शिकायतें सरकार तक पहुंच रही थीं। इस पर की गई कार्रवाई में अब तक इंदौर में 44 और भोपाल में 13 गृह निर्माण सहकारी समितियों के पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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