बंटवारा विफल होने पर अनिल आरआईएल के उपाध्यक्ष होंगे : आरएनआरएल
कृष्णा-गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस को लेकर विवाद की सुनवाई कर रही प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष जेठमलानी ने कहा, "रिलायंस के बंटवारे का विफल होना आरआईएल के लाखों शेयर धारकों के हित में भी नहीं होगा।"
जेठमलानी ने कहा, "कंपनी कानून की धारा 392 के तहत यदि इस योजना को क्रियान्वित नहीं किया गया, जैसी कि परिकल्पना की गई है, तो अनिल अंबानी आरआईएल के निदेशक मंडल में पूरे अधिकार के साथ 27 जुलाई 2004 से पूर्व की स्थिति में बहाल होने के अधिकारी होंगे।"
अनिल अंबानी बंटवारे से पूर्व आरआईएल के उपाध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और निदेशक मंडल के सदस्य थे।
जेठमलानी ने कहा कि न तो अनिल के बड़े भाई मुकेश और न ही उनकी कंपनी के पास ऐसा अधिकार है जिससे कि वह कहें कि उन्हें परिवार पुनर्गठन समझौते के बारे में जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा कि 27 जुलाई, 2004 को आरआईएल निदेशक मंडल में पारित प्रस्ताव मुकेश अंबानी को पूरा नियंत्रण सौंपते हुए अनिल अंबानी की शक्तियों, स्थिति, सम्मान और गरिमा को वस्तुत: छीन लेता है। उन्होंने कहा, "इसी कारण अनिल अंबानी हुआ रुष्ट हए थे और उन्होंने अपने को अपमानित महसूस किया था।"
जेठमलानी ने कहा, "प्रोमोटर-निदेशक-जीवनकालिक निदेशक- के रूप में मुकेश अंबानी अवकाश प्राप्त करने के लिए बाध्य नहीं है और इसके लिए शेयरधारकों के प्रस्ताव की जरूरत नहीं है।"
इसके मुताबिक आरआईएल यह दावा नहीं कर सकता कि रिलायंस समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की पत्नी कोकिला बेन ने झगड़ रहे अपने दोनों बेटों के बीच परिवार व्यवसाय पुनर्गठन समझौते को तैयार किया है और उसे मानने के लिए कंपनी बाध्य नहीं है।
जेठमलानी ने कहा, "अदालत के पास बंटवारे की योजना का परीक्षण करने का अधिकार है, जिसमें योजना को सही तरह से क्रियान्वित कर सभी बाधाओं को निश्चित तौर पर खत्म करना सुनिश्चित किया गया गया है।"
गौरतलब है कि खंडपीठ आरआईएल के नियंत्रण वाली कृष्णा-गोदावरी बेसिन से आरएनआरएल को 2.34 डॉलर प्रति बैरल की दर से 17 वर्षो तक 2.8 करोड़ बैरल गैस की आपूर्ति को लेकर जारी विवाद की सुनवाई कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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