महिला लड़ाकू विमान चालकों के मसले पर विचार होगा : राष्ट्रपति

पाटिल ने सुखोई की 30 मिनटों की उड़ान पूरी कर इतिहास रच दिया। वह सुखोई में सवार होने वाली दुनिया की पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष बन गई हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें महिलाओं की क्षमता पर भरोसा है, परंतु लड़ाकू विमानों के परिचालन में उन्हें शामिल करने का फैसला सेना के तीनों अंगों द्वारा लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों वायु सेना के उपप्रमुख एयर मार्शल पी. के. बारबोरा ने कहा था कि लड़ाकू विमानों के परिचालन के लिए महिला पायलटों को रख पाना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। उनके इस बयान से विवाद खड़ा हो गया था।

पाटिल ने संवाददाताओं से कहा, "तकनीकी शिक्षा और योग्यता एवं हालात कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर वायु सेना और सरकार फैसला या विचार करेगी। परंतु मैं यह कहना चाहती हूं कि मुझे महिलाओं की क्षमता पर पूरा भरोसा है।"

राष्ट्रपति ने सुखोई में सुबह 10.55 बजे उड़ान भरी। राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक उड़ान का गवाह बनने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया बड़ी संख्या में मौजूद था। इसके अलावा महाराष्ट्र के गवर्नर एस. सी. जमीर और वायु सेना प्रमुख पी. वी. नाइक भी यहां उपस्थित थे।

पाटिल ने कहा, "पहले सेना के तीनों अंगो में महिलाएं नहीं थीं। इस पर विचार हुआ और फिर उन्हें शामिल किया गया। अब तीनों अंगों में महिलाएं अब हेलीकॉप्टर व परिवहन विमान चालक एवं अधिकारी हैं। अब उन्हें लड़ाकू विमानों के परिचालन में शामिल करने पर बात चल रही है।"

राष्ट्रपति ने कहा, "महिला अधिकारियों के पास पूरी योग्यता और प्रदर्शन करने की क्षमता मौजूद है। अब तक उन्होंने जो भी काम किया है, बहुत ही बेहतरीन ढंग से किया है। मुझे उनकी क्षमताओं पर कोई संदेह नहीं है।"

गौरतलब है कि मौजूदा समय में वायु सेना के विभिन्न क्षेत्रों में 748 महिलाएं कार्यरत हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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