सुखोई में सफर से निहाल हुईं राष्ट्रपति पाटिल (लीड-3)
उड़ान पूरा के बाद उन्होंने विजेता के चिह्न् को प्रदर्शित किया। बेहद खुश और उत्साहित नजर आ रहीं राष्ट्रपति ने पुणे के लाहेगांव एयर बेस पर मौजूद जवानों से हाथ मिलाया।
मीडिया से मुखातिब पाटिल ने कहा, "आशंका की कोई बात नहीं थी, लेकिन यह उत्साहजनक जरूर था। शुरुआत से ही मैं सहज थी और अब भी मैं बिल्कुल सहज हूं।"
अक्सर साड़ी पहनने वाली राष्ट्रपति ने रोमांचक उड़ान के दौरान जी-शूट पहना था, जो उड़ान के दौरान उच्च गुरुत्वाकर्षण दबाव के साथ सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है।
राष्ट्रपति ने कहा, "आज यह मेरे लिए एक अद्भुत और अनोखा अनुभव था। मुझे बताया गया है कि हम पूरी तरह से सुसज्जित हैं और अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने की ताकत रखते हैं। मैं इस समय गौरवान्वित महसूस करती हूं।"
उन्होंने कहा, "आज मुझे फक्र हैं सभी भारतीयों को रक्षा बलों की क्षमता, त्याग की भावना एवं योग्यता पर गर्व करना चाहिए। सुरक्षा बलों की मैं प्रशंसा करती हूं।"
इससे पहले पुणे के बाहरी हिस्से में स्थित वायु सेना के लोहेगांव बेस से विंग कमांडर ए. सजन ने बेहद कुशल तरीके से सुखाई को उड़ाया। वायु सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि विमान ने 10,000 फुट की ऊंचाई पर लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी, परंतु यह 1,100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के सुपरसोनिक स्तर पर नहीं गया।
राष्ट्रपति ने सुखोई में सुबह 10.55 बजे उड़ान भरी। इससे पहले लोहेगांव बेस पहुंचने पर पाटिल को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। चिकित्सा जांच के बाद पाटिल ने एक विशेष जी-सूट धारण किया।
पाटिल 10.35 बजे विमान के भीतर पहुंची। उड़ान भरने से पहले उन्होंने एक गिलास पानी मांगा, लेकिन बाद में उन्होंने पानी पीने से मना कर दिया। इससे उनका उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता था।
राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक उड़ान का गवाह बनने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया बड़ी संख्या में मौजूद था। इसके अलावा महाराष्ट्र के गवर्नर एस. सी. जमीर और वायु सेना प्रमुख पी. वी. नाइक भी यहां उपस्थित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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