चीन के रुख़ पर मनमोहन सख़्त

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि चीन का विकास अलोकतांत्रिक व्यवस्था को चला रहे एक शासन समूह की उपलब्धि है और इसे हासिल करने में मानवाधिकारों, बहु-सांस्कृतिक मूल्यों की अनदेखी की गई है.

उन्होंने चीन के प्रति कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि चीन के रुख में एक तरह की कठोरता देखने को मिल रही है और भारत की इस पर नज़र है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "चीन के रवैये में एक तरह की कठोरता है. मेरे लिए पूरी तरह से यह समझ पाना कठिन है कि चीन ऐसा क्यों कर रहा है. हम इस बात को अपने ध्यान में रखकर चल रहे हैं."

मनमोहन सिंह सोमवार को अमरीकी थिंक टैंक काउंसिल फ़ॉर फॉरेन रिलेशंस को संबोधित कर रहे थे.

हालांकि मनमोहन सिंह ने चीन के प्रति अपनी चिंताओं का विस्तार से ज़िक्र तो नहीं किया लेकिन चीन के रवैये और हाल की घटनाओं को गंभीरता से लेने का संकेत ज़रूर दिया.

चीन पर चिंता

पिछले दिनों चीन ने भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के लोगों को वीज़ा भारतीय पासपोर्ट पर न देकर एक अलग कागज़ पर देना शुरू कर दिया था.

यह एक तरह का संकेत था कि चीन कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानता.

भारत में कई राजनीतिक हलकों ने इसपर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की थी. भारत सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया था.

इतना ही नहीं, चीन ने भारतीय प्रधानमंत्री की अरुणाचल यात्रा पर भी अपनी आपत्ति ज़ाहिर की थी.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पाकिस्तान सरकार कुछ परियोजनाओं को चीन की मदद से चला रही है. भारत इसपर भी अपनी चिंता व्यक्त कर चुका है.

हालांकि पिछले दिनों दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाक़ात भी हुई लेकिन जानकार बताते हैं कि दोनों देशों के बीच संबंधों में एक तनाव साफ़ दिखाई देता है.

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