राजस्थान मंडप में 50 लाख रुपये के सामान की बिक्री
इस बिक्री में अकेले राजस्थान लघु उघोग निगम लिमिटेड के उपक्रम 'राजस्थली' ने पिछले सप्ताह के अंत तक करीब 30 लाख रुपये की बिक्री कर ली थी।
राजस्थान मंडल में विशेष कर हल्के वजन और गर्म मिजाज की जयपुरी रजाइयों राजस्थानी प्रिंट की साड़ियों और अन्य वस्त्रों के साथ राजस्थान के लाख की चूड़ियां, श्रंगार के अन्य साजो-सामान और राजस्थानी मोजड़ियों (जूतियां) की मांग सबसे अधिक है।
इसके अलावा राजस्थान की तिल पापड़ी, गजक, बीकानेर के मशहूर पापड़, नमकीन- भुजिया, डिब्बा बंद मिष्ठान, चूर्ण, मसाले, सूखी सब्जियां, कैर सांगरी और राजस्थानी व्यंजनों दाल- बाटी- चूरमा, बेसन गट्टे, प्याज, मूंग की दाल और मीठी कचौड़ियां आदि की खूब बिक्री हो रही है।
राजस्थान मण्डप में उपलब्ध हस्तशिल्प को विविधताओं और कलात्मकता से परिपूर्ण दुनियां भर में बेजोड़ एवं लोकप्रिय बताते हुए राजस्थान लघु उघोग निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोहर कांत ने कहा कि प्रदेश के मास्टर क्राफ्ट्समेन को विभिन्न क्रस्टल के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखारने और परम्परागत हस्तशिल्प के साथ-साथ उसमें नई विधाएं जोड़ने, डिजाइन, मार्केटिंग और अन्य मार्गदर्शन देने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
राजस्थान मंडप में इस बार विशेष रूप से लगाए गए 'शिल्प आंगन' भी इसी कड़ी में एक प्रयास है ताकि प्रदेश के हस्तशिल्पयों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान मिल सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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