17 वर्षो के इंतजार के बाद सार्वजनिक हुई लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट (राउंडअप)
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने पहले लोकसभा में और फिर राज्यसभा में रिपोर्ट की अंग्रेजी प्रति पेश की। राज्यसभा में इस रिपोर्ट को पेश किए जाने के दौरान सपा और भाजपा के सदस्य आपस में भिड़ गए।
चिदंबरम जब राज्यसभा में लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पेश करते हुए वक्तव्य दे रहे थे, तभी भाजपा सदस्यों ने 'जयश्रीराम' के नारे लगाने शुरू कर दिए। सपा महासचिव अमर सिंह ने इसका प्रतिवाद किया। इसके बावजूद भाजपा सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी। इससे आक्रोशित अमर सिंह भाजपा नेता एस. एस. अहलुवालिया की ओर बढ़े। दोनों के बीच धक्का-मुक्की हुई और इस बीच अन्य सदस्य बीच-बचाव के लिए पहुंचे। मामला बिगड़ते देख राज्यसभा के उपसभापति के. रहमान खान सदन छोड़कर चले गए और इसके कुछ देर बाद सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा की कार्यवाही दो बजे जब दोबारा शुरू हुई तो अमर सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर खेद जाहिर करते हुए सदन और अहलुवालिया से क्षमा मांगी, जबकि अहलुवालिया ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि ऐसा न होता तो अच्छा होता।
बहरहाल, आयोग ने अपनी रिपोर्ट में जिन 68 लोगों को दोषी ठहराया गया है उनमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, शिव सेना के अध्यक्ष बाल ठाकरे, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के नेता अशोक सिंघल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरसंघचालक के. एस. सुदर्शन, के. एन. गोविंदाचार्य, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतम्भरा और प्रवीण तोगड़िया के नाम भी शामिल हैं।
रिपोर्ट में कल्याण और संघ परिवार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "कल्याण सिंह की सरकार संघ परिवार के उद्देश्यों की पूर्ति करने का सबसे आवश्यक तत्व बन गई थी। कल्याण सिंह संघ परिवार की उम्मीदों पर खरे उतरे।"
रिपोर्ट के मुताबिक, "कल्याण सिंह की सरकार ने योजनाबद्ध व व्यवस्थित तरीके से शक्तिशाली पदों से उन अधिकारियों को हटाया जो उसके लिए असुविधा पैदा कर सकते थे। सुरक्षा संबंधी उपकरणों को खत्म किया। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के समक्ष उन्होंने लगातार झूठ बोला। देश की जनता के समक्ष उन्होंने संवैधानिक सरकार देने का वादा किया था लेकिन ऐसा न कर उन्होंने मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "संकट की उस घड़ी में भी कल्याण मूकदर्शक बने रहे। अयोध्या आंदोलन को रोकने और ढांचा गिराए जाने से कारसेवकों को रोकने के लिए उन्होंने एक कदम भी नहीं उठाया। कल्याण सिंह और उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को अतिरिक्त संवैधानिक अधिकार दे दिए थे। मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट के सहयोगी इस मामले में अग्रणी रहे और उन्हीं के चलते पूरी व्यवस्था तहस-नहस हुई।"
रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या में मुसलमानों पर हो रहे हमलों की जानकारी दिए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री ने पुलिस बल को गोली चलाने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों का भी इस्तेमाल नहीं किया जो कि किया जा सकता था।
लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी 'गूंगे, बहरे और अंधे' बने रहे। उन्हें कम से कम सांप्रदायिक उन्माद और लोकतंत्र का बलात्कार रोकने की कोशिश करनी चाहिए थी लेकिन वे गूंगे, बहरे और अंधे बने रहे और उसका एक हिस्सा बन गए।
रिपोर्ट में कहा गया है, "राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने राजनीतिक दुस्साहस को सिर्फ नजरंदाज ही नहीं किया, बल्कि राज्य की व्यवस्था को क्रमबद्ध ढंग से पंगु बनाने के लिए मुख्यमंत्री और संघ परिवार के साथ मिलकर साठगांठ भी की।"
एक सदस्यीय आयोग ने इस विध्वंस और सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए कई प्रशासनिक अधिकारियों को निजी तौर पर दोषी ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "पुलिस और प्रशासन संघ, विहिप, भाजपा, बजरंग दल, शिव सेना आदि के मंसूबों के निष्पादक थे।"
लिब्रहान ने अपनी रिपोर्ट कहा है कि किसी भी सूरत में राजनीति और धर्म को नहीं जोड़ा जाना चाहिए। राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए ऐसा करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए।
इसमें कहा गया है, "छह दिसम्बर, 1992 की घटना और उसके फलस्वरूप हुई घटनाओं ने राजनीति और धर्म के जुड़ाव की गंभीर और विघटनकारी क्षमता से देश को परिचित कराया है। धर्म, जाति और क्षेत्रीयता का इस्तेमाल प्रतिगामी और खतरनाक प्रवृत्ति है। यह प्रवृत्ति लोगों को अलग-अलग धड़ों में बांट देती है।"
न्यायमूर्ति लिब्रहान ने कहा है, "राजनीति और धर्म के गठजोड़ का अध्ययन होना चाहिए और इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए जल्द से जल्द उपाय किए जाने चाहिए। धर्म और जाति के नाम पर लोकतंत्र को बंधक बना लेना अनुचित, अनैतिक और गैरकानूनी है। राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआईसी) को संविधान में परिकल्पित धर्मनिरपेक्षता के क्रियान्वयन के लिए वैधानिक शक्ति प्रदान की जानी चाहिए।"
आयोग ने यह भी कहा है कि राजनीतिक दलों का अपराधीकरण और राजनीतिक तथा धार्मिक मामलों का घालमेल सामान्य सी बात होकर रह गई है। राजनीतिक सत्ता की प्राप्ति के लिए धर्म, जाति इत्यादि के गलत इस्तेमाल करने के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए और इसके लिए अलग से कानून बनना चाहिए।
रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि राजनीतिक मकसद के लिए धर्म का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ निर्वाचन आयोग कड़ी कार्रवाई करे और हो सके तो उन्हें राजनीतिक पद धारण करने के अयोग्य करार दिया जाना चाहिए।
कल्याण सिंह ने आयोग की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस सुनियोजित साजिश नहीं थी। कल्याण ने कहा कि उन्हें इस रिपोर्ट में राजनीतिक षडयंत्र की बू आती है। उन्होंने कहा कि छह दिसम्बर, 1992 को जहां अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा।
कल्याण ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैं बताना चाहता हूं कि बाबरी विध्वंस के लिए कोई सुनियोजित योजना नहीं रची गई थी। इसमें कोई षडयंत्र नहीं था। छह दिसम्बर को जो कुछ हुआ वह जनभावनाओं का विस्फोट था।"
उन्होंने कहा कि उन्होंने कारसेवकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बेंत और आंसू गैस के इस्तेमाल की इजाजत दी थी लेकिन, "मैंने साफ कर दिया था कि कार सेवकों पर गोली नहीं चलनी चाहिए। यदि मैंने ऐसा कर दिया होता तो लाखों कार सेवकों की जान चली जाती।"
उन्होंने कहा, "मेरे पास सवाल यह था कि बचाऊं तो किसे बचाऊं। मैंने जनसंहार होने से रोका। इसी प्रकिया में ढांचा टूट गया।"
कल्याण ने कहा, "इस घटना पर मुझे कोई खेद नहीं है। छह दिसम्बर मेरे लिए गर्व का दिन है। मस्जिद वहां से हटनी चाहिए थी, वह हट गई और अब वहां भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए।"
कांग्रेस ने इस रिपोर्ट पर कहा कि सरकार लिब्रहान आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई करेगी और इस मामले की चल रही पुलिस जांच में यदि नया कुछ सामने आया तो वह पूरक आरोप पत्र भी दायर करेगी।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कार्रवाई रिपोर्ट आयोग की सिफारिशों पर ही आधारित होगी। उन्होंने कहा, "लेकिन पुलिस जांच को आगे बढ़ाने के लिए यह सिफारिशें एक आधार होगी। यदि कोई नई जानकारी आती है तो पूरक आरोप पत्र दायर किया जा सकता है और किया जाएगा।"
सिंघवी ने कहा कि लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वास्तविक चेहरे, उसके चरित्र और उसके विचारों को उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा, "यह उसकी दुखद, गंदी राजनीति है जिसमें आम आदमी के जीवन की कोई चिंता नहीं है।"
केंद्रीय कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को दोषी ठहराया जाना उसके लिए स्पष्ट चेतावनी है कि अब वह साम्प्रदायिकता की राजनीति करना छोड़ दे।
मोइली ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, "लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट में संघ परिवार और भाजपा नेताओं को दोषी ठहराया जाना राष्ट्र के लिए शर्मनाक है। अब उन्हें यदि मुख्यधारा की राजनीति करनी है तो उन्हें खुद को बदलना होगा। यह उन्हें चेतावनी है।"
उन्होंने कहा, "उन्हें खुद को साम्प्रदायिकता और घृणा की राजनीति छोड़ राष्ट्रीय सौहाद्र्र की नीतियों की ओर मोड़ना होगा। यदि वे इसे टकराव के मुद्दे के रूप में देखते हैं, तो दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं नहीं समझता की देश की जनता उन्हें माफ करेगी।"
यह पूछे जाने पर कि क्या जिन नेताओं को इस रिपोर्ट में दोषी ठहराया गया है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, इस बारे में उन्होंने कहा, "उन्हें देश के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।"
भाजपा ने लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट मीडिया में लीक होने के मसले पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस मामले में जिम्मेदारी तय करने तथा संयुक्त संसदीय समिति से इसकी जांच कराने की मांग की है।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से चर्चा में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा, "रिपोर्ट के लीक होने की नैतिक जिम्मेदारी गृह मंत्री को लेनी चाहिए। इसकी जांच होनी चाहिए और शीतकालीन सत्र के खत्म होने से पहले इसकी रिपोर्ट सदन में पेश की जानी चाहिए।"
वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा, "खुद गृह मंत्री ने कहा था कि रिपोर्ट की दो ही प्रतियां हैं। एक प्रति उनके पास और दूसरी लिब्रहान के पास। फिर यह लीक कैसे हुई।"
जिन 68 लोगों को दोषी ठहराया गया है उनके नाम हैं-:
1 -आचार्य धर्मेद्र देव ,धर्म संसद
2-आचार्य गिरिराज किशोर , विश्व हिन्दू परिषद
3-ए.के.सरन, तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (सुरक्षा) उत्तर प्रदेश
4-अखिलेश मेहरोत्रा, तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक फैजाबाद
5-अशोक सिंघल, विश्व हिन्दू परिषद
6-अशोक सिन्हा, तत्कालीन सचिव, पर्यटन, उत्तर प्रदेश
7-अटल बिहारी वाजपेयी, भाजपा
8-बद्री प्रसाद तोषनीवाल, विश्व हिन्दू परिषद
9-बैकुंठ लाल शर्मा, विश्व हिन्दू परिषद
10-बालासाहेब ठाकरे, शिवसेना
11-बी.पी. सिंघल, विश्व हिन्दू परिषद
12-ब्रह्म दत्त द्विवेदी, भाजपा, तत्कालीन राजस्व मंत्री उत्तर प्रदेश
13-चंपत राय, स्थानीय निर्माण प्रबंधक
14-दाउदयाल खन्ना, भाजपा
15-डी. बी. राय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक फैजाबाद
16-देवराहा बाबा, संत समाज
17-गुर्जन सिंह, भाजपा/राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
18-गुमानमल लोढ़ा, भाजपा
19-के.एन गोविंदाचार्य, भाजपा
20-एच. वी. शेषाद्रि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
21-जय भगवान गोयल, शिवसेना
22-जयभान सिंह पवरिया, बजरंग दल
23-के.एस .सुदर्शन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
24-कलराज मिश्रा, भाजपा
25-कल्याण सिंह, भाजपा (तत्कालीन मुख्यमंत्री)
26-कुशाभाऊ ठाकरे, भाजपा
27-लालजी टंडन, भाजपा, तत्कालीन ऊर्जा मंत्री, उत्तर प्रदेश
28-लल्लू सिंह चौहान, भाजपा
29-लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा
30-महंत अवैद्यनाथ, हिन्दू महासभा
31-महंत नृत्य गोपाल दास, राम जन्मभूमि न्यास
32- महंत परमहंस रामचंद्र दास, विश्व हिन्दू परिषद
33-मोरेश्वर दीनानंत सावे, शिवसेना
34-मोरोपंत पिंगले , शिवसेना
35-मुरली मनोहर जोशी, भाजपा
36-ओम प्रताप सिंह
37-ओंकार भावे, विश्व हिन्दू परिषद
38-प्रमोद महाजन, भाजपा
39-प्रवीण तोगड़िया, विश्व हिन्दू परिषद
40-प्रभात कुमार, तत्कालीन प्रधान सचिव (गृह) उत्तर प्रदेश
41-पुरूषोत्तम नारायण सिंह, विश्व हिन्दू परिषद
42-राजेंद्र गुप्ता, तत्कालीन मंत्री, उत्तर प्रदेश
43-राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
44-राम शंकर अग्निहोत्री, विश्व हिन्दू परिषद
45-राम विलास वेदांती, संत समाज
46-आर. के. गुप्ता, भाजपा, तत्कालीन वित्त मंत्री, उत्तर प्रदेश
47-आर. एन. श्रीवास्तव, तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, फैजाबाद
48-साध्वी ऋतम्भरा, संत समाज
49-शंकर सिंह वाघेला, भाजपा
50-सतीश प्रधान, शिवसेना
51-श्रीचंद्र दीक्षित, भाजपा
52-सीता राम अग्रवाल
53-एस. पी. गौर, तत्कालीन आयुक्त, उत्तर प्रदेश
54-सुंदर सिंह भंडारी, भाजपा
55-सूर्य प्रताप साही, तत्कालीन मंत्री, उत्तर प्रदेश
56-स्वामी चिन्मयानंद, विश्व हिन्दू परिषद
57-स्वामी सच्चिदानंद साक्षी उर्फ साक्षीजी महाराज, विश्व हिन्दू परिषद
58-एस. वी. एम. त्रिपाठी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक
59-स्वामी सतमित रामजी, संत समाज
60-स्वामी सत्यानंद, संत समाज
61-स्वामी वामदेव, संत समाज
62-उमा भारती, विश्व हिन्दू परिषद
63-यू.पी. वाजपेयी, तत्कालीन उप महानिरीक्षक, फैजाबाद
64-विजयाराजे सिंधिया, भाजपा
65-वी. के. सक्सेना, तत्कालीन मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश
66-विनय कटियार, भाजपा
67- विष्णु हरि डालमिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
68-युद्धनाथ पांडेय, शिवसेना
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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