पाकिस्तान से वार्ता बहाली के खिलाफ है जनमत : प्रधानमंत्री (लीड-2)
वाशिंगटन, 24 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के चार दिवसीय राजकीय दौरे पर यहां आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिह ने पाकिस्तान से आतंकवाद छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि 26/11 के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के बगैर जनमत पड़ोसी देश के साथ समग्र वार्ता बहाल करने के खिलाफ है।
बहरहाल प्रधानमंत्री ने समग्र वार्ता को बहाल करने के लिए कुछ निश्चित शर्तो सहित एक प्रस्ताव पाकिस्तान को दिया। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद छोड़ दे और अच्छी भावना और गंभीरता के साथ वार्ता में शामिल हो तो भारत जम्मू एवं कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत फिर शुरू करने के लिए तैयार है।
सोमवार को अमेरिका के एक शीर्ष थिंक टैंक कौंसिल ऑन फॉरेन अफेयर्स (सीएफआर) में अपने भाषण में सिंह ने कहा, "मेरी सरकार ने पिछले कुछ वर्षो में पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए बहुत काम किया।"
उन्होंने कहा कि मुंबई पर 26/11 के हमले से पहले दोनों देशों ने विवादास्पद मुद्दों के दीर्घकालिक और स्थाई हल के रास्ते में उल्लेखनीय प्रगति की थी।
मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हमले के घाव अब भी हरे हैं। आतंकवाद सभ्य समाज के लिए एक भारी खतरा है और उसे पराजित किया जाना चाहिए।"
उधर, विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि पाकिस्तान के साथ वार्ता आरंभ करने के लिए वर्तमान स्थिति अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता और संसद का रुख आतंकवादियों के खिलाफ उचित कार्रवाई के बिना पाकिस्तान से वार्ता करने के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वे मुंबई हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर और दबाव बनाए।
उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान को नाकाम होते नहीं देखना चाहते। पाकिस्तान में लोकतंत्र का उदय स्वागतयोग्य है लेकिन साथ ही हमें यह भी देखना होगा कि वहां कुछ ऐसी ताकते भी हैं जो आतंकवादियों के साथ हैं।"
प्रधानमंत्री ने एक सवाल पर कहा कि सीमा विवाद को लेकर चीन के अक्रामक तेवरों के कारणों को समझने में वह पूरी तरह असमर्थ हैं।
उन्होंने कहा, "हम पिछले पांच वर्षो से चीन से वार्ता की कोशिश कर रहे हैं। चीन के साथ हमारा सीमा विवाद लंबे समय से है। हम इसे वार्ता के माध्यम से सुलझाना चाहते हैं।"
पिछले महीने थाईलैंड में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से मुलाकात करने वाले मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे इस संबंध में चीन के शीर्ष नेतृत्व से आश्वासन हासिल हुआ लेकिन चीनी पक्ष इसको लेकर निश्चित रूप अक्रामक है। मैं इसका कारण समझने में पूरी तरह असमर्थ हूं। यह एक चिंता है।"
प्रधानमंत्री ने तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा की अरूणाचल प्रदेश यात्रा और चीन के उस पर आपत्ति जताने की घटना के संदर्भ में भारत-चीन संबंधों पर यह टिप्पणी की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications