बाबरी विध्वंस न तो स्वस्फूर्त था और न ही अनियोजित : लिब्रहान
मंगलवार को संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट ने मंदिर निर्माण आंदोलन के लिए पूरे संघ परिवार को जिम्मेदार ठहराया है।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम.एस.लिब्रहान ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को छद्म नरमपंथी करार दिया है और बाबरी विध्वंस में उनकी भूमिका के लिए उनकी निंदा की है।
इस 1,029 पृष्ठों वाली रिपोर्ट में कहा गया है, "यह बात संदेह से परे साबित होती है कि बाबरी विध्वंस की घटना न तो स्वस्फूर्त थी न ही अनियोजित। यह न तो जन भावनाओं का उबाल था और न ही किसी विदेशी साजिश का परिणाम, जैसी कि कुछ लोगों ने ऐसी कहानी गढ़ने की कोशिश की है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के लिए पूरे संघ परिवार को 'श्रेय' दिया जाना चाहिए या 'दोषी' ठहराया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है, "संघ परिवार एक राजनीतिक पार्टी का एक सफल और कॉरपोरेटाइज्ड मॉडल है और जैसा कि अयोध्या अभियान से जाहिर होता है कि यह एक समृद्ध संगठनात्मक ढांचे के रूप में विकसित हो गया है।"
वाजपेयी, आडवाणी और जोशी को लेकर इस रिपोर्ट में कहा गया है, "इन नेताओं को संदेह का लाभ नहीं दिया जा सकता और इन्हें दोष से बरी नहीं किया जा सकता।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "इन नेताओं ने जनता के विश्वास को तोड़ा है और उनकी कार्रवाइयां मतदाताओं द्वारा निर्देशित नहीं थी, बल्कि कुछ लोगों के एक समूह द्वारा निर्देशित थीं, जिन्होंने अपने उस एंजेडा को लागू करने के लिए उनका इस्तेमाल किया जिस पर आम जनता की सहमति नहीं थी।"
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "लोकतंत्र में इससे बड़ा विश्वासघात या अपराध दूसरा नहीं हो सकता और आयोग को इन छद्म नरमपंथियों की निंदा करने में जरा भी हिचक नहीं है।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "इस घटना के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (विहिप), शिव सेना, बजरंग दल और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व प्रथम दृष्टया जिम्मेदार हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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