लिब्रहान रिपोर्ट : कल्याण सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "कल्याण सिंह की सरकार संघ परिवार के उद्देश्यों की पूर्ति करने का सबसे आवश्यक तत्व बन गई थी। कल्याण सिंह संघ परिवार की उम्मीदों पर खरे उतरे।"
रिपोर्ट के मुताबिक, "कल्याण सिंह की सरकार ने योजनाबद्ध व व्यवस्थित तरीके से शक्तिशाली पदों से उन अधिकारियों को हटाया जो उसके लिए असुविधा पैदा कर सकते थे। सुरक्षा संबंधी उपकरणों को खत्म किया। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के समक्ष उन्होंने लगातार झूठ बोला। देश की जनता के समक्ष उन्होंने संवैधानिक सरकार देने का वादा किया था लेकिन ऐसा न कर उन्होंने मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "संकट की उस घड़ी में भी कल्याण मूकदर्शक बने रहे। अयोध्या आंदोलन को रोकने और ढांचा गिराए जाने से कारसेवकों को रोकने के लिए उन्होंने एक कदम तक नहीं उठाया।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "कल्याण सिंह और उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को अतिरिक्त संवैधानिक अधिकार दे दिए थे। मुख्यमंत्री और उनके केबिनेट के सहयोगी इस मामले में अग्रणी रहे और उन्हीं के चलते पूरी व्यवस्था तहस-नहस हुई।"
रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या में मुसलमानों पर हो रहे हमलों की जानकारी दिए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री ने पुलिस बल को गोली चलाने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों का भी इस्तेमाल नहीं किया जो कि आसानी से किया जा सकता था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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