धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को कड़ी सजा मिले : लिब्रहान

न्यायमूर्ति लिब्रहान ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "छह दिसम्बर, 1992 की घटना और उसके फलस्वरूप हुई घटनाओं ने राजनीति और धर्म के जुड़ाव की गंभीर और विघटनकारी क्षमता से देश को परिचित कराया है।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "धर्म, जाति और क्षेत्रीयता का इस्तेमाल प्रतिगामी और खतरनाक प्रवृत्ति है। यह प्रवृत्ति लोगों को अलग-अलग धड़ों में बांट देती है।"

न्यायमूर्ति लिब्रहान ने कहा है, "मै सिफारिश करता हूं कि राजनीति और धर्म के विभाजन का अध्ययन होना चाहिए और इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए।"

आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा है, "धर्म और जाति के नाम पर लोकतंत्र को बंधक बना लेना अनुचित, अनैतिक और गैरकानूनी है।"

सिफारिश में कहा गया है कि राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआईसी) को संविधान में परिकल्पित धर्मनिरपेक्षता के क्रियान्वयन के लिए वैधानिक शक्ति प्रदान की जानी चाहिए।

आयोग ने यह भी कहा है कि राजनीतिक दलों का अपराधीकरण और राजनीतिक तथा धार्मिक मामलों का घालमेल सामान्य सी बात होकर रह गई है। राजनीतिक सत्ता की प्राप्ति के लिए धर्म, जाति इत्यादि के गलत इस्तेमाल करने के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए और इसके लिए अलग से कानून बनना चाहिए।

रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई है कि राजनीतिक मकसद के लिए धर्म का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ निर्वाचन आयोग कड़ी कार्रवाई करे और हो सके तो उन्हें राजनीतिक पद धारण करने के अयोग्य करार दिया जाना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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