प्रशासन ने चलने दी संघ परिवार की मनमानी : लिब्रहान रिपोर्ट

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी 'गूंगे, बहरे और अंधे' बने रहे। यह बात लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कही है।

न्यायमूर्ति एम. एस. लिब्रहान ने अपनी 1000 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा है, "उन्हें कम से कम सांप्रदायिक उन्माद और लोकतंत्र का बलात्कार रोकने की कोशिश करनी चाहिए थी लेकिन वे गूंगे, बहरे और अंधे बने रहे और उसका एक हिस्सा बन गए।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने राजनीतिक दुस्साहस को सिर्फ नजरंदाज ही नहीं किया, बल्कि राज्य की व्यवस्था को क्रमबद्ध ढंग से पंगु बनाने के लिए मुख्यमंत्री और संघ परिवार के साथ मिलकर सांठगांठ भी की।"

एक सदस्यीय आयोग ने इस विध्वंस और सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए कई प्रशासनिक अधिकारियों को निजी तौर पर दोषी ठहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "पुलिस और प्रशासन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी, बजरंग दल, शिव सेना आदि के मंसूबों के निष्पादक थे।"

रिपोर्ट के निष्कर्ष में लिब्रहान ने कहा है कि 1992 के समय तक आते-आते लोक सेवा में आ चुका मूल्यों का अपकर्ष और क्षरण उत्तर प्रदेश में एकदम स्पष्ट था।

उन्होंने लिखा है, "मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं हो रही है कि वे उस समय सत्तासीन राजनीतिक दलों का ही हिस्सा बन गए थे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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