लिब्रहान आयोग की जांच रिपोर्ट संसद में पेश (लीड-1)
लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट और उस पर कार्रवाई रिपोर्ट पहले लोकसभा में पेश की गई। लोकसभा में प्रश्नकाल समाप्त होते ही 12 बजे इसे सदन के पटल पर रखा गया। फिलहाल इसका सिर्फ अंग्रेजी संस्करण ही पेश किया गया है।
जब केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम लोकसभा में रिपोर्ट पेश कर रहे थे तो विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)सदस्य रिपोर्ट की विषयवस्तु पर सदन में चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार नारेबाजी कर रहे सदस्यों को शांत करने में सफल रहीं और सदन में सामान्य कामकाज शुरू हो गया।
उधर, राज्यसभा में इस रिपोर्ट को पेश किए जाने के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा)भाजपा के सदस्यों के बीच विवाद के कारण अप्रिय स्थिति पैदा हो गई।
चिदंबरम जब राज्यसभा में लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पेश करते हुए वक्तव्य दे रहे थे, तभी भाजपा सदस्यों ने 'जयश्रीराम' के नारे लगाने शुरू कर दिए। इससे सपा महासचिव अमरसिंह नाराज हो गए और भाजपा नेता एस. एस. अहलूवालिया की ओर बढ़े। अमर सिंह और अहलूवालिय के बीच धक्का-मुक्की हुई और इस बीच अन्य सदस्य बीच-बचाव के लिए पहुंच गए।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी स्थिति को नियंत्रित नहंीं कर सके। हंगामा जारी देख उप सभापति आर. रहमान खान ने सदन की कार्यवाही अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में अमरसिंह ने कहा कि वह अपने आचरण पर शर्मिदा हैं। उन्होंने कहा, "मैं सदन और अहलूवालिया से माफी मांगूगा। मेरा विरोध इस बात पर था कि सदन में 'जय श्रीराम' के नारे न लगें।"
उन्होंने कहा कि अगर इस तरह के नारे लगेंगे तो मुस्लिम भी 'या अली' के नारे लगाने लगेंगे। यह ठीक नहीं रहेगा। सिंह ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में इस तरह की नारेबाजी ठीक नहीं है। सिंह ने कहा, "मैं दुखी हूं। अपने आचरण से आहत हूं और क्षमा मांगने को तैयार हूं।"
उन्होंने कहा कि भाजपा को चाहिए कि वह राम के नाम पर राजनीति न करें, राम के नाम पर रोटियां न सेंके। राम का नाम बदनाम न करें। सिह ने कहा, "मैं उन्हें नारेबाजी करने से रोकना चाहता था। मैं उन्हें समझाने गया था। तभी धक्का-मुक्की शुरू हो गई।" उन्होंने कहा कि वह अपने आचरण से दुखी हैं।
संसद भवन परिसर में अहलूवालिया ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सपा महासचिव के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है, इसका फैसला सदन करे। उन्होंने कहा कि वह अपनी ओर इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे।
बाद में सदन की बैठक शुरू होने पर अमर सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर खेद जाहिर करते हुए क्षमा मांगी, जबकि अहलूवालिया ने इसे दुर्भाग्यजनक करार देते हुए कहा कि ऐसा न होता तो अच्छा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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