रेल समितियों में बुद्धिजीवियों को ऊंचे वेतन दिए जाने का ममता ने किया बचाव
ममता बनर्जी ने बांग्ला टेलीविजन चैनल, स्टार आनंद के साथ रविवार की रात एक साक्षात्कार के दौरान कहा, "मैं रेल मंत्री हूं। यह मेरी मर्जी है। मैं (मुख्यमंत्री) बुद्धदेव भट्टाचार्य या वाम मोर्चा के भ्रष्ट मंत्रियों से कोई मसौदा तैयार करने नहीं जा रही हूं।"
रेलमंत्री के निर्णय के तहत रंगकर्मी सोनाली मित्रा को रेलवे की विरासत और संस्कृति समिति का प्रमुख बनाया गया है और उन्हें इसके लिए 50,000 रुपये वेतन निर्धारित किया गया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मुख पत्र, बांग्ला दैनिक गणशक्ति में मित्रा के वेतन और सुविधाओं की आलोचना की गई है। इस समिति के अन्य सदस्यों में रंगकर्मी बिवास चक्रवर्ती व अर्पिता घोष, कवि जॉय गोस्वामी, शास्त्रीय गायक राशिद खान और फिल्म निर्देशक रितुपर्णो घोष शामिल हैं।
वेतन के अलावा दी जाने वाली सुविधाओं में राज्यों के दौरे के लिए एक्जिक्यूटिव क्लास का विमान टिकट, बैठक के लिए 520 रुपये का विशेष भत्ता, परिवहन भत्ता और रेल अधिकारियों के बराबर महंगाई भत्ता, कार सुविधा, एसटीडी सहित टेलीफोन सुविधा और स्वास्थ्य सुविधा शामिल है।
बनर्जी ने कहा, "यह सरकारी नियमों के अनुसार है। वे सब सरकार को अपना समय दे रहे हैं और इसलिए सरकार उन्हें वेतन दे रही है।"
बनर्जी ने आगे कहा , "वे सब धन के भूखे नहीं हैं। वास्तव में सोनाली मित्रा ने मुझसे कहा था कि इस समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए उनके पास समय नहीं है। उन्होंने मुझसे यह भी कहा था कि वह इसके लिए पैसा नहीं लेंगी। लेकिन मैंने काफी प्रयास के बाद उन्हें राजी किया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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