बाबरी विध्वंस का जिन्न फिर बोतल से बाहर, संसद में हंगामा (राउंडअप)

इस मुद्दे पर सोमवार को संसद के दोनो सदनों में हंगामा हुआ। रिपोर्ट में कथित रूप से पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के नाम का जिक्र होने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा विरोध किया। भाजपा सहित अन्य दलों ने इस रिपोर्ट के मीडिया मे लीक होने की निंदा की और इसे तत्काल संसद में रखे जाने की मांग की, जिस पर सरकार ने इस रिपोर्ट को संसद के चालू सत्र में ही सदन में रखने का आश्वासन दिया।

समाचार पत्र 'इंडियन एक्सप्रेस' में कथित रिपोर्ट के अंश प्रकाशित होने के बाद आज संसद के दोनों सदनों में जबर्दस्त हंगामा हुआ और दो बार के स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही मंगलवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई। समाचार पत्र में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक लिब्रहान आयोग ने वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित भाजपा के कई नेताओं को बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए दोषी ठहराया है।

भाजपा ने रिपोर्ट को संसद में पेश किए जाने की मांग को लेकर दोनों सदनों में नारेबाजी की, जिस पर गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने आश्वासन दिया कि रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र में ही सदन के पटल पर रख दी जाएगी।

बतौर नेता प्रतिपक्ष आडवाणी ने पहली बार लोकसभा में कोई कार्यस्थगन प्रस्ताव रखा जिसे लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अस्वीकार कर दिया लेकिन उन्हें बोलने का मौका दिया।

आडवाणी ने कहा, "जिस रिपोर्ट में मेरे वरिष्ठ नेता और काफी समय से अस्वस्थ चल रहे वाजपेयीजी का उल्लेख किया गया है उसे देखकर मुझे लगा कि यह मेरा कर्तव्य बन जाता है कि जिनके नेतृत्व में मैंने जीवनभर राजनीति में काम किया, उनके खिलाफ आज की उनकी अवस्था में कोई इस प्रकार की बात कहे तो मैं विरोध करूं। इसलिए मैंने यहां खड़े होने का फैसला किया। उनका नाम देखकर मैं हैरान रह गया।"

उन्होंने कहा, "मेरा या मेरी पार्टी का नाम आए तो उसे मैं चुनौती के रूप में स्वीकार करूंगा लेकिन वाजपेयी जी का नाम लिए जाने से मैं स्तब्ध हूं।" लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छह दिसंबर, 1992 की घटना उनके जीवन की सबसे दुखद घटना है और यह बात उन्होंने आयोग के समक्ष भी कही थी।

उन्होंने कहा, "मैं अयोध्या आंदोलन से जुड़कर खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। वहां भव्य राम मंदिर का निर्माण हो, यह मेरे जीवन की साध है और जब तक यह साध पूरी न होगी, तब तक मैं इसके लिए काम करता रहूंगा।"

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा, "सदन चलने के दौरान इस रिपोर्ट के लीक होने को मैं अच्छा नहीं मानता। लेकिन जहां तक नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनका सौभाग्य है तो मेरा भी सौभाग्य है कि इनका और हमारा टकराव इसी मुद्दे पर हुआ।"

उन्होंने कहा, "वह टकराव मामूली नहीं हुआ। उस समय पूरे देश में ऐसी आग लगी थी, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। यह लिब्रहान आयोग 16 साल पहले गठित किया गया था। अब हालत यह है कि उस समय जो बच्चा था अब जवान हो गया, जो जवान था वह बूढ़ा हो गया और जो बूढ़ा था वह मर गया लेकिन रिपोर्ट अभी तक सदन में नहीं आई। आखिर इसकी क्या वजह है। "

उन्होंने कहा, "एक रिलायंस कंपनी है। उसकी रोजाना सुनवाई हो रही है। रोजाना पैरवी हो रही है। आखिर लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट को यहां रखकर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। मैं सरकार से जानना चाहता हूं कि अगर रिपोर्ट लीक हुई है तो वह कहां से लीक हुई है। यह सदन तब चले जब इस रिपोर्ट को सदन में रखा जाए।"

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दारासिंह चौहान ने भी रिपोर्ट को तत्काल पेश किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा, "रिपोर्ट लंबित है। इसे पहले ही सदन में रखा जाना चाहिए था। मैं केवल इतना कहूंगा कि रिपोर्ट तत्काल यहां पर आनी चाहिए। बिना संसद में रिपोर्ट आए इसका लीक हो जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि रिपोर्ट लीक कैसे हुई।"

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बासुदेव आचार्य ने कहा, "हम लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश की जानी चाहिए। लेकिन इसे पेश करने की बजाए इसे लीक किया जा रहा है।"

इस पर गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि लिब्रहान आयोग की जांच रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में ही संसद के पटल पर रख दी जाएगी।

चिदंबरम ने लोकसभा में कहा कि आयोग ने गत 30 जून को रिपोर्ट सौंपी थी। इसे छह महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट के साथ संसद में पेश करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "हम इसे संसद के शीतकालीन अधिवेशन में ही पेश करेंगे।"

उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक समाचार पत्र ने आयोग की रिपोर्ट के तथ्य प्राप्त होने का दावा करते हुए इस संबंध में खबर प्रकाशित की है।"

उन्होंने कहा, "रिपोर्ट की एक ही प्रति है और वह पूरी हिफाजत से रखी गई है और मैं सदन को आश्वासन देता हूं कि गृह मंत्रालय से किसी ने भी इस बारे में किसी से बातचीत नहीं की है।"

उधर, राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर भाजपा ने जोरदार हंगामा किया जिसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद मंगलवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में विपक्षी दलों ने रिपोर्ट के लीक होने की जांच कराने की मांग की।

संसद से बाहर भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से और झारखण्ड विधानसभा चुनाव में इसका लाभ लेने के लिए रिपोर्ट को लीक किया है। गन्ना किसानों के मुद्दे पर समूचा विपक्ष एकजुट हो गया था। इस मुद्दे पर सरकार बचाव की मुद्रा में थी। उसने विपक्ष को बांटने के लिए इस रिपोर्ट को लीक कर दिया।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा, "इसे राजनीतिक मकसद से लीक किया गया है। सरकार को पूरी रिपोर्ट सदन में पेश करनी चाहिए, हम उस पर चर्चा करेंगे।"

भाजपा के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडू ने कहा, "सरकार को हमें बताना होगा कि रिपोर्ट कैसे लीक हुई। यह सरकार की साजिश है, क्योंकि कई मसलों पर विपक्ष ने उसे घेर रखा था।" पिछले सप्ताह गन्ना किसानों के आंदोलन के मुद्दे ने संसद का कामकाज प्रभावित किया था। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों को भी गैर कांग्रेसी दल सरकार के खिलाफ मुद्दा बने रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा, "इस रिपोर्ट को तैयार होने में 17 साल लगे। इसकी विषय वस्तु कोई नहीं जानता था। हम भी इसका ब्यौरा जानना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश का ध्यान बढ़ती महंगाई जैसे ठोस मसले से हटाने के लिए इसे 'सुनिश्चित योजना' के तहत लीक किया है।

रिपोर्ट मीडिया में लीक होने को गंभीर मामला बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि उसे भरोसा है कि सरकार इसका संज्ञान लेगी और जल्द से जल्द इसे संसद में पेश करेगी।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि नियमत: सरकार को किसी भी रिपोर्ट को छह महीने के भीतर सार्वजनिक करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लिब्रहान आयोग के मामले में यह अवधि दिसम्बर में पूरी होगी।

रिपोर्ट के मीडिया में लीक होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने मीडिया की खोजी पत्रकारिता की सराहना की और साथ ही यह भी कहा कि यह एक गंभीर मामला है।

उन्होंने कहा, "मुझे भरोसा है कि सरकार भी इसका संज्ञान लेगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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