पाकिस्तान में किसके साथ बात की जाए, हमें नहीं मालूम : मनमोहन (लीड-1)
वाशिंगटन, 23 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर सोमवार को यहां पहुंचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुंबई हमले के षड्यंत्रकारियों के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि पड़ोसी देश में एक लोकतांत्रिक सरकार के होने के बावजूद वास्तविक शक्ति सेना के हाथों में है और ऐसी स्थिति में किसके साथ बातचीत की जाए, यह उन्हें नहीं मालूम।
समाचार चैनल सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में मनमोहन ने कहा कि शर्म-अल शेख में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि मुंबई हमले के संदर्भ में पाकिस्तान हर संभव कार्रवाई करेगा। परंतु ऐसा नहीं हो रहा है।
यह पूछे जाने पर कि उनके विचार से अब पाकिस्तान को कौन चला रहा है? मनमोहन सिंह ने कहा, "मेरे विचार से पाकिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति सेना है।"
उन्होंने कहा, "वहां लोकतंत्र है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र सफल हो और वह प्रगति करे, लेकिन हमें मालूम है कि आज वहां सत्ता वास्तव में सेना के हाथ में है।" यह पूछे जाने पर कि आज पाकिस्तान में वह किसके साथ बात कर सकते हैं, मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे नहीं पता।"
एक अन्य पड़ोसी चीन के साथ कथित तनावपूर्ण स्थिति की बात को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और चीन प्रतिस्पर्धी नहीं हैं क्योंकि दोनों देशों मेंअपने विकास की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद है। भारत से तीन गुनी बड़ी चीनी अर्थव्यवस्था के बारे मे प्रधानमंत्री ने कहा, "जहां तक भारत का संबंध है मैं कई बार कह चुका हूं कि भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति होने के नाते विकास में मदद के लिए भारत को दोहरे उपयोग की प्रौद्योगिकी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम एक परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र हैं, लेकिन साथ ही हम एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति हैं।"
यह पूछे जाने पर कि परमाणु समझौते के तहत भारत को संबंधित प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर ओबामा प्रशासन प्रशासन के कड़े रुख से क्या वह चिंतित हैं, सिंह ने कहा, "जनसंहार के इन हथियारों के अनधिकृत प्रसार में योगदान नहीं देने का हमारा त्रुटिहीन रिकार्ड है। इसलिए मेरा मानना है कि भारत को वैश्विक समुदाय से अधिक प्रतिफल की जरूरत है।"
सिंह ने कहा, "भारत को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आवश्यकता है और दोहरे उपयोग की प्रौद्योगिकी पर प्रतिबंध से हमारा विकास प्रभावित होगा।"
इससे पहले प्रधानमंत्री का सेंट एंड्रयू एयरफोर्स बेस पर औपचारिक स्वागत किया गया। अमेरिकी वायुसेना के बैंड ने मनमोहन सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया।
व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ प्रोटोकॉल कैप्रिशिया मार्शल, अमेरिका के विदेश उपमंत्री (दक्षिण एशिया) राबर्ट ब्लैक, भारत में अमेरिका के राजदूत टिमोथी जे.रोमर और अमेरिका में भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने सिंह की अगवानी की।
प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए भारी संख्या में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक भी पहुंचे थे। मनमोहन सिंह रणनीतिक भागीदारी को आगे बढ़ाने के लिए मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ विस्तृत द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में सहयोग बढ़ाने के लिए एक ढांचे के निर्माण और परमाणु समझौते के बचे हुए कार्यो को पूरा करने के साथ ही दोनों पक्षों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों, व्यापार और निवेश, कृषि, स्वास्थ्य और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 10 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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