लिब्रहान जांच रिपोर्ट पर संसद में हंगामा, रिपोर्ट पेश करने की मांग (लीड-4)
समाचार पत्र 'इंडियन एक्सप्रेस' में कथित रिपोर्ट के अंश प्रकाशित होने के बाद सोमवार को संसद के दोनों सदनों में जबर्दस्त हंगामा हुआ और बार-बार के स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। भाजपा ने रिपोर्ट को संसद में पेश किए जाने की मांग को लेकर दोनों सदनों में नारेबाजी की हालांकि गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने आश्वासन दिया कि रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में ही सदन के पटल पर रख दी जाएगी।
समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट के अनुसार लिब्रहान आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित भाजपा के कई नेताओं को बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए दोषी ठहराया गया है।
रिपोर्ट लीक होने के मद्देनजर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट को तत्काल सदन में पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह रिपोर्ट के अंश देखकर स्तब्ध हैं।
लोकसभा में इसी मुद्दे पर आडवाणी के कार्यस्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने उन्हें बोलने का मौका दिया । आडवाणी ने कहा, "अखबार की खबर में वाजपेयी का भी उल्लेख है। जिनके नेतृत्व में मैंने जीवन भर राजनीति में काम किया, उनके खिलाफ, उनकी आज की अवस्था में कोई इस प्रकार की बात कहे, यह देखकर मैंने यहां खड़े होने का फैसला किया।"
उन्होंने कहा, "मेरा या मेरी पार्टी का नाम आए तो उसे मैं चुनौती के रूप में स्वीकार करूंगा लेकिन वाजपेयी जी का नाम लिए जाने से मैं स्तब्ध हूं। " लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छह दिसंबर, 1992 की घटना उनके जीवन की सबसे दुखद घटना है और यह बात उन्होंने आयोग के समक्ष भी कही थी।
उन्होंने कहा, "मैं अयोध्या आंदोलन से जुड़कर खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। वहां भव्य राम मंदिर का निर्माण हो, यह मेरे जीवन की साध है और जब तक यह साध पूरी न होगी, तब तक मैं इसके लिए काम करता रहूंगा।"
आडवाणी के अलावा कुछ अन्य दलों के नेताओं मसलन समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) के बासुदेव आचार्य, बहुजन समाज पार्टी के दारासिंह चौहान(बसपा) ने भी रिपोर्ट को तत्काल पेश किए जाने की मांग की।
इस पर गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि लिब्रहान आयोग की जांच रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में ही संसद के पटल पर रख दी जाएगी।
चिदंबरम ने लोकसभा में कहा कि आयोग ने गत 30 जून को रिपोर्ट सौंपी थी। इसे छह महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट के साथ संसद में पेश करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "हम इसे संसद के शीतकालीन अधिवेशन में ही पेश करेंगे।"
उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक समाचार पत्र ने आयोग की रिपोर्ट के तथ्य प्राप्त होने का दावा करते हुए इस संबंध में खबर प्रकाशित की है।"
उन्होंने कहा, "रिपोर्ट की एक ही प्रति है और वह पूरी हिफाजत से रखी गई है और मैं सदन को आश्वासन देता हूं कि गृह मंत्रालय से किसी ने भी इस बारे में किसी से बातचीत नहीं की है।"
उधर, संसद से बाहर भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से और झारखण्ड विधानसभा चुनाव में इसका लाभ लेने के लिए रिपोर्ट को योजनाबद्ध तरीके से लीक किया है। गन्ना किसानों के मुद्दे पर समूचा विपक्ष एकजुट हो गया था। इस मुद्दे पर सरकार बचाव की मुद्रा में थी। उसने विपक्ष को बांटने के लिए इस रिपोर्ट को लीक कर दिया।
आडवाणी ने कहा, "यह रिपोर्ट पिछले अधिवेशन में क्यों नहीं पेश की गई, जब हम इसकी मांग करते रहे। हमें कहा गया कि रिपोर्ट कार्रवाई रिपोर्ट के साथ पेश की जाएगी। हमारी मांग है कि जांच रिपोर्ट आज ही कार्रवाई रिपोर्ट के साथ पेश की जाए।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा, "इसे राजनीतिक मकसद से लीक किया गया है। सरकार को पूरी रिपोर्ट सदन में पेश करनी चाहिए, हम उस पर चर्चा करेंगे।"
भाजपा के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडू ने कहा, "सरकार को हमें बताना होगा कि रिपोर्ट कैसे लीक हुई। यह सरकार की साजिश है, क्योंकि कई मसलों पर विपक्ष ने उसे घेर रखा था।" पिछले सप्ताह गन्ना किसानों के आंदोलन के मुद्दे ने संसद का कामकाज प्रभावित किया था। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों को भी गैर कांग्रेसी दल सरकार के खिलाफ मुद्दा बने रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा, "इस रिपोर्ट को प्रकाशित होने में 17 साल लगे। इसकी विषय वस्तु कोई नहीं जानता था। हम भी इसका ब्यौरा जानना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश का ध्यान बढ़ती महंगाई जैसे ठोस मसले से हटाने के लिए इसे 'सुनिश्चित योजना' के तहत लीक किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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