दलाई लामा ने अपनी अरूणाचल यात्रा के लिए भारत की प्रशंसा की (लीड-1)
दलाई लामा ने एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा है, "तवांग जाने के पहले मैं बहुत चिंतित था। दरअसल, मैं नहीं चाहता कि भारत और चीन के बीच तनाव बढ़े।"
ज्ञात हो कि दलाई लामा के तवांग दौरे को लेकर भारत-चीन के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था। बीजिंग अरूणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। चीन ने मांग की थी कि दलाई लामा को अरूणाचल प्रदेश के दौरे की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर भारतीय नेताओं ने दलाई लामा को 'सम्मानित अतिथि' करार दिया था और कहा था कि दलाई लामा देश में कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन एक शरणार्थी के रूप में उन्हें राजनीतिक बयान देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह मुद्दा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच थाईलैंड के हुआ हिन में हुई बातचीत में भी उठा था। उसके बाद चीन, नई दिल्ली की आलोचना को लेकर थोड़ा शांत हुआ था।
दलाई लामा ने कहा है कि चीन के भारी दबाव के बावजूद भारत अपने रूख पर अडिग बना रहा। उन्होंने आगे कहा, "मैं सोचता हूं कि हाल के दिनों में भारत चीन के खिलाफ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा रहा है।"
दलाई लामा ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की उस आलोचना को लेकर भी उनका बचाव किया, जिसमें कहा गया है कि अपने चीन दौरे के दौरान ओबामा ने तिब्बत के मुद्दे पर चीन पर कोई दबाव नहीं बनाया।
दलाई लामा ने कहा, "ओबामा चीन के प्रति नरम नहीं हैं। यह उनकी बस एक अलग शैली है।" दलाई लामा ने कहा कि ओबामा से मिल पाने में विफल रहने पर वह निराश नहीं हैं।
दलाई लामा ने कहा कि उन्हें लगता है कि ओबामा तिब्बत मसले पर मनमोहन सिंह के साथ वाशिंगटन में चर्चा करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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