तेंदुलकर महाराष्ट्र के लिए नहीं, बीसीसीआई के लिए खेलते हैं : शिवसेना

एक समारोह के दौरान तेंदुलकर का यह कहना कि वह पहले भारतीय हैं और फिर मराठी, शिवसेना को इतना बुरा लगा कि उसने तेंदुलकर के खिलाफ एक के बाद एक तल्ख बयान जारी करने शुरू कर दिए।

सामना के संपादक संजय राउत ने अपने संपादकीय लेख में लिखा है, "तेंदुलकर महाराष्ट्र से बड़े नहीं हो सकते। वह लोकमान्य तिलक, राजगुरु, भगत सिंह जैसे नहीं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान न्यौछावर की थी। वह बेशक महान क्रिकेटर हैं लेकिन उनके रिकार्ड बीसीसीआई की धरोहर हैं। उनके रिकाडरे का महाराष्ट्र से कुछ लेना-देना नहीं है।"

राउत आगे लिखते हैं कि महाराष्ट्र को मुंबई इसलिए नहीं मिला कि तेंदुलकर ने 17,000 टेस्ट रन बनाए हैं। उन्होंने लिखा है, "महाराष्ट्र का चरित्र और उसका अस्तित्व तेंदुलकर के चौकों और छक्कों का मोहताज नहीं है। महाराष्ट्र के लिए वे लोग ज्यादा अहमियत रखते हैं जिन्होंने देश के लिए जान दी है। तेंदुलकर इस श्रेणी में कहीं नहीं है।"

राउत के मुताबिक एक बार यशवंतराव चव्हाण ने कहा था कि नेहरू महाराष्ट्र से बड़े हैं लेकिन बाद में उन्हें इसके लिए माफी मांगनी पड़ी थी। राउत के मुताबिक, "जब नेहरू महाराष्ट्र से बड़े नहीं हो सकते भला क्रिकेट के सम्राट तेंदुलकर किस लिहाज से ऐसे हो सकते हैं।"

शिवसेना को दरअसल यह बात सबसे अधिक बुरी लगी है कि तेंदुलकर ने साफ शब्दों में यह कहा था कि मुंबई किसी की जागीर नहीं, यह 'सबकी' है।

गौरतलब है कि तेंदुलकर के खिलाफ शिवसेना की बयानबाजी की सभी दलों ने निंदा की है। यहां तक की उसकी राजनीतिक सहयोगी भाजपा ने भी इसे गलत ठहराया है। इसी के बाद शिवसेना ने तेंदुलकर के खिलाफ नया बयान जारी किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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