रोहतांग त्रासदी : शवों को मनाली लाया गया
बचाव दल ने शनिवार को बर्फ में दबे इन शवों को खोज निकाला था और इन्हें यहां से 35 किलोमीटर दूर मरही स्थित आधार शिविर लाया गया था।
अतिरिक्त मंडल मजिस्ट्रेट आर.के.प्रुथी ने आईएएनएस से कहा, "इन नौ शवों को रोहतांग र्दे में बर्फ से शनिवार को खोज निकाला गया था और इन्हें रविवार की शाम मनाली ले आया गया। सोमवार को शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा।"
अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान के उप निदेशक महावीर ठाकुर ने कहा, "समूचा रोहतांग दर्रा इस समय बर्फ की चादर में लिपटा हुआ है। अक्टूबर माह से ही दर्रे को वाहन से भी पार करने की सलाह नहीं दी जा सकती।"
उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूट के द्वारा लाहौल घाटी में कोकसर बचाव चौकी पर चेतावनी जारी करने के बावजूद श्रमिकों ने दर्रे को पार करने की कोशिश की।
इंस्टीट्यूट ने भारी बर्फबारी के समय मोटरसाइकिल सवारों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए दो अस्थायी चौकी बनाई है जिनमें से एक कोकसर में है दूसरी मरही में।
यहां से 52 किलोमीटर दूर रोहतांग दर्रा कोकसर के रास्ते मनाली और लाहौल घाटी को जोड़ता है। यह पिछले नौ नवंबर से यातायात के लिए बंद है।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में रोहतांग दर्रे के समीप जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग बल (जीआरईएफ) के 75 से अधिक श्रमिक शुक्रवार को बर्फीली हवाओं की चपेट में आ गए। श्रमिक लाहौल घाटी से आ रहे थे।
इस दौरान नौ लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी जबकि बाकी लोग जान बचाने में सफल हो गए थे। ये सभी लोग पिछले 11 दिनों से बर्फबारी की वजह से घाटी में फंसे हुए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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