मुजीब के 4 हत्यारे राष्ट्रपति से लगाएंगे क्षमा की गुहार
शेख मुजीब और उनके परिजनों की हत्या के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने बीते गुरुवार को मौत की सजा पाए सेना के पांच पूर्व अधिकारियों की अपील खारिज करते हुए देश से बाहर रहने वाले सात अन्य लोगों की सजा-ए मौत की पुष्टि कर दी थी।
लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) सैयद फारुक-उर रहमान, मेजर सेवानिवृत्त बज्लुल होदा, लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) मुहिउद्दीन अहमद और लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) ए. के . एम. मुहिउद्दीन अहमद ने राष्ट्रपति से क्षमा याचना करने की अपनी इच्छा जाहिर कर दी है। दूसरी ओर से पांचवें पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) सुल्तान शहरयार राशिद खान ने अब तक कोई फैसला नही किया है।
'बंगबंधु' के नाम से मशहूर शेख मुजीब उन दिनों बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे। पाकिस्तान से अलग मुल्क की स्थापना के लिए शेख मुजीब द्वारा शुरू किए गए आंदोलन के चार साल पूरे होने से पहले ही 15 अगस्त 1975 की सुबह एक विद्रोह में उनकी और परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी गई थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि 15 अगस्त 1975 का घटनाक्रम साधारण हत्याकांड था और यह किसी विद्रोह का परिणाम नहीं था। इस हत्याकांड में बंगबंधु के परिवार के दो सदस्य ही बचे थे। उनकी बड़ी पुत्री एवं प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जनवरी में सत्ता में लौटते ही अदालती कार्रवाई दोबारा शुरू की थी।
जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई, उनमें से ज्यादातर जूनियर अधिकारी थे। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) सैयद फारुक-उर रहमान, लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) सुल्तान शहरयार राशिद खान, लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) मुहिउद्दीन अहमद, लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) ए. के . एम. मुहिउद्दीन अहमद, मेजर सेवानिवृत्त बज्लुल होदा, लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) खांडकर अब्दुर राशिद, मेजर (सेवानिवृत्त) शरीफुल हक दालिम, लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) ए. एम. राशिद चौधरी, लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) एस. एच. एम. बी. नूर चौधरी, लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) मोहम्मद अब्दुल अजीज पाशा, कैप्टन (सेवानिवृत्त) अब्दुल माजिद और रिसालदार (सेवानिवृत्त) मुस्लिमुद्दीन शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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