गन्ना किसान ने फसल जलाकर आत्महत्या की
बागपत के असारा गांव का इसबुद्दीन (51 वर्ष) शुक्रवार देर शाम अपने खेत पहुंचा और पांच बीघे गóो की फसल में आग लगा दी। आग भयानक होने के बाद वह खुद भी उसमें कूद गया, जिसमें जलकर उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों के मुताबिक अपना कर्ज चुकाने के लिए इसबुद्दीन गóो को 270 रुपये प्रति क्विंटल से कम दाम पर बेचने को राजी नहीं था। इस वजह से वह पिछले काफी दिनों से तनाव में था। तनाव के कारण वह बीते एक सप्ताह से अपने घरवालों से बातचीत नहीं कर रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि जब इसबुद्दीन ने अपनी फसल को आग लगाई तो वे दूर थे और उन्हें लगा कि वह उपयोग में न आने वाले खराब गóो को आग लगा रहा है। बाद में वह आग में कूद गया। यह देखकर थोड़ी दूर पर मौजूद उसका भाई दौड़कर वहां पहुंचा और उसे बचाने के प्रयास में खुद भी झुलस गया।
जिले के रामला थाना-प्रभारी परवेज खान ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि इसबुद्दीन के भाई को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है।
गौरतलब है कि गन्ना किसान 280 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य की मांग कर रहे हैं। इसी बीच केंद्र सरकार गन्ना किसानों की मांग मानते हुए शुक्रवार को गन्ना मूल्य नीति में संशोधन का आदेश वापस लेने पर राजी हो गई। इसके तहत राज्य सरकारें राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय कर सकेंगी और उसका भुगतान चीनी मिल मालिकों को करना होगा।
उधर गन्ना किसानों का कहना है कि अध्यादेश में संशोधन के फैसले के साथ ही केंद्र सरकार से टकराव समाप्त हो गया है लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तय किए गए एसएपी (170 रुपये प्रति क्विंटल) के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। किसान 170 रुपये प्रति क्विंटल पर मिलों को गन्ना नहीं देंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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