चीन का कश्मीर के साथ सीधा संपर्क है: मीरवाइज (लीड-3)
एक गैर सरकारी संगठन के निमंत्रण पर चीन के दौरे पर जाने की जद्दोजहद में लगे मीरवाइज ने कहा कि चीन का कश्मीर में काफी प्रभाव है और कश्मीर के साथ उसका सीधा संपर्क है, क्योंकि कश्मीर का कुछ हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। मीरवाइज अक्साई चीन इलाके का जिक्र कर रहे थे। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर विवाद में चीन कोई पक्ष नहीं है।
मीरवाइज ने श्रीनगर में संवाददाताओं को बताया, "मैं मानता हूं कि कश्मीर विवाद में चीन कोई पक्ष नहीं है लेकिन जहां तक क्षेत्र में शांति का सवाल है, तो चीन की उसमें हिस्सेदारी है। इसलिए हुर्रियत कांफ्रेंस चीन और अमेरिका द्वारा दक्षिण एशिया के मुद्दों पर अपनाए गए दृष्टिकोण का स्वागत करता है।"
दूसरी ओर सरकार ने शुक्रवार को कहा है कि जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी संगठन 'हुर्रियत कांफ्रेंस' के उदारवादी धड़े के प्रमुख मीरवाइज उमर फारुक चीन सहित कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं बशर्ते उनका वीजा नत्थी किया हुआ नहीं होना चाहिए।
हाल के दिनों में चीनी दूतावास ने चीन यात्रा करने वाले कश्मीरवासियों के पासपोर्ट के साथ नत्थी किया हुआ वीजा जारी किया है।
मीरवाइज की 28 नवंबर को ईद के बाद चीन और पाकिस्तान जाने की योजना है।
विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से कहा, "वह जहां कहीं भी जाना चाहते हैं, वहां जाने के लिए स्वतंत्र हैं।"
इसके कुछ समय बाद विदेश सचिव निरूपमा राव ने मंत्रालय की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कश्मीरी नेता का वीजा नत्थी किया हुआ नहीं होना चाहिए जैसा कि चीन ने राज्य में जन्मे अन्य लोगों के साथ किया है।
राव ने कहा, "हमने कश्मीरी नेताओं के विदेश दौरे को प्रतिबंधित नहीं किया है।" साथ ही उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर और अरूणाचल प्रदेश के लोगों को नत्थी किया हुआ वीजा करने पर भारत सरकार की आपत्तियां दोहराई।
उन्होंने कहा कि जन्म स्थल के आधार को कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
राव से जब यह पूछा गया कि मीरवाइज की चीन यात्रा से लगता है कि चीन कश्मीर मसले में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहा है तो उन्होंने कहा, "हम इस विचार को स्वीकार नहीं करते।"
राजनीतिक हलकों में मीरवाइज की इस प्रस्तावित यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह ऐसे समय पर होने जा रही है जब चीन द्वारा जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को नत्थी किया गया वीजा जारी करने के मसले पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मतभेद हैं।
मीरवाइज के करीबी सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि वह जल्द ही चीन के वीजा के लिए आवेदन करेंगे। अगर उनकी यह यात्रा संभव होती है तो चीन का दौरा करने वाले वह पहले कश्मीरी अलगाववादी नेता होंगे।
इस्लामाबाद यात्रा के दौरान मीरवाइज पाकिस्तानी नेताओं के साथ अपनी मुलाकात में कश्मीर मुद्दे पर एक प्रस्ताव के बारे में चर्चा करेंगे। बीजिंग में वह एक व्याख्यान देंगे।
पाकिस्तान यात्रा के बारे में चर्चा करते हुए मीरवाइज ने आईएएनएस से कहा था, "हम पाकिस्तानी नेताओं से मिलेंगे। यह कश्मीर मसले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की हमारी कोशिश का हिस्सा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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