व्यापार मेले में राजस्थान पैवेलियन बना कलाप्रेमियों का तीर्थस्थल
प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और बहुआयामी विकास की कहानी कहता राजस्थान मण्डप जन आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यद्यपि मण्डप को भारत व्यापार संवद्र्घन प्राधिकरण द्वारा निर्धारित इस वर्ष की केन्द्र विषय वस्तु (थीम) सेवाओं के निर्यात के अनुरुप सजाया गया है किन्तु प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति के विविध कलात्मक आयाम भी आसानी से देखे जा सकते हैं।
मण्डप का बाहरी स्वरुप शानदार गौरवशाली हवेली की भाँति सजाया गया है। मण्डप के मुख्य द्वार और बाहरी दीवारों पर पिछवाई शैली में की गई पेंटिग्स जहां एक तरफ राज्य की निपुण भित्ति चित्र कला का नमूना है, वहीं उकेरे गए भित्ति चित्र मारवाड़ शैली में हैं और भगवान राम और शिव के साथ ही राजस्थान की पारंपरिक चित्र शैली आध्यात्मिक और जीवन दर्शन की अनुभूति करवा कर इतिहास को जीवन्त कर रही है।
मण्डप में प्रवेश करते ही जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग के फूल महल की झांकी में रंगीन शीशों की कलात्मकता और सुनहरी पेंटिग्स से उकेरे गए फूलों के साथ ही लाल, हरे, नीले व बहुरंगों की चित्रकारी को सुनहरी ब्रश से संवारा गया है।
मण्डप में संगमरमर और लकड़ी के विविध आइटम्स पर किए गये कलात्मक कार्य को देखने पर लगता है मानों कलाकार ने अपनी कला के फन की जादूगरी को साकार रुप दे दिया है। मार्बल पर सुनहरी कलम, इनेलो वर्क और सोने के कलर से कलात्मक कलश, बाक्स आदि पर किए गए कार्य को दर्शक अपलक देखते रह जाते हैं। इसी प्रकार लकड़ी पर बारीक और कलात्मक कार्य से बनाये गये हाथी, घोड़े, ऊंट और अन्य सजावटी सामान पर उत्कीर्ण कला बेजोड़ है।
मण्डप में प्रतापगढ़ की थेवा कला के आभूषण, सोने एवं चांदी के अन्य आभूषणों पर मीनाकारी का कार्य, थैड्र ज्वैलरी, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, ताम्बे और पीतल के बर्तनों की नक्काशी, कलाकृतियां, हस्तशिल्प के अन्य आइटम्स देखने योग्य हैं।
मण्डप के प्रथम तल पर शेखावाटी, किशनगढ़, जोधपुर शैली के साथ ही लकड़ी के अन्य कलात्मक फर्नीचर और उनकी नक्काशी, पीतल से सजाए गए फर्नीचर की बानगी और जेम्स स्टोन पेंटिग्स एवं मार्बल को तराशकर सुन्दर पेिंटंग की कलाकृतियां प्रदेश के कलाकारों की निपुण जादूगरी दिखाती है। मण्डप में प्रदर्शित गहनों की विशिष्टता,थेवा कला, मीनाकारी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख रखती है ।
मंडप में खानपान की वस्तुएं ब्यावर की मशहूर तिल पट्टी, बीकानेर के नमकीन, रसगुल्ले आदि के साथ ही मुख्य द्वार पर लोक कलाकारों की नृत्य कला का दूसरा पक्ष उजागर करते हैं
राजस्थान पैवेलियन की सैर कलात्मकता के बहुमुखी पक्षों से दर्शकों को रुबरु कराती है तभी तो यात्रा कलाप्रेमी राजस्थान मण्डप की ओर चुम्बकीय आकर्षण की भांति खिंचे चले आते हैं। मंडप में राजस्थान की पारंपरिक कला धरोहर के साथ-साथ आधुनिक राजस्थान की तस्वीर अतीत और वर्तमान का संगम करवा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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