मनमोहन जेनेवा पहुंचे, ओबामा के साथ रणनीतिक साझेदारी पर होगी चर्चा (राउंडअप)
इसके साथ ही उनकी पांच दिवसीय अमेरिका यात्रा शुरू हो जाएगी। मनमोहन सिंह मंगलवार को ओबामा के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी को एक अलग ऊंचाई पर ले जाने के लिए बातचीत करेंगे।
इस बीच से तिब्बतियों के धर्म गुरु दलाई लामा ने शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 'बेदाग राजनीतिज्ञ' करार देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात के दौरान वह तिब्बत मसले पर जो भी संभव होगा करेंगे।
सिंह की यह यात्रा आतंकवाद, परमाणु अप्रसार और जलवायु परिवर्तन की प्रमुख वैश्विक चुनौतियों के बीच दोनों देशों में प्रगाढ़ होती रणनीतिक भागीदारी के नए प्रारूप को उजागर करेगी। मनमोहन सिंह मंगलवार को ओबामा से द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मसलों पर बातचीत करेंगे।
अमेरिका तथा त्रिनिदाद एवं टोबैगो रवाना होने से पूर्व मनमोहन सिंह ने नई दिल्ली में कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और अमेरिका की सतत एवं गतिशील साझेदारी जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "द्विपक्षीय स्तर पर हम व्यापार और निवेश, सेवाओं, ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रक्षा, उच्च प्रौद्योगिकी व्यापार, शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक बनाकर रणनीतिक वार्ता को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं।" उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को उच्च प्राथकिता देता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षो में दोनों देशों के आपसी रिश्तों में बदलाव आया है और उन्हें उम्मीद है कि उनकी यात्रा से इन्हें और गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक मंदी, दोहा दौर की व्यापार वार्ता और परमाणु नि:शस्त्रीकरण जैसी वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने के इच्छुक हैं। सिंह ने कहा, "मुझे अफगानिस्तान की स्थिति और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।"
अमेरिका के दौरे में प्रधानमंत्री वरिष्ठ अमेरिकी मंत्रियों तथा कांग्रेस के प्रमुख सदस्यों से मुलाकात करेंगे। वह अमेरिकी चैंबर ऑफ कामर्स और अमेरिका-भारत व्यापार परिषद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक व्यापारिक समारोह में भी हिस्सा लेंगे। वह अमेरिका की 'काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस' को संबोधित करेंगे और वुडरो विल्सन सेंटर में भाषण देंगे।
अमेरिका दौरे के बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रमंडल देशों के राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पोर्ट ऑफ स्पेन जाएंगे।
सीआईआई का शिष्टमंडल अमेरिका में :
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) का उच्च स्तरीय शिष्टमंडल पहले से ही वहां मौजूद है।
यह शिष्टमंडल निर्यात, निवेश और दोनों पक्षों के बीच सहयोग के अवसरों की संभावनाओं का पता लगाने के लिए 23 नवंबर तक ह्यूस्टन, डेट्रॉयट, शिकागो और वाशिंगटन सहित कई शहरों का दौरा करेगा।
सीआईआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "भारत क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त वैश्विक आर्थिक ताकत बनता जा रहा है। ऐसे में कंपनियां विशिष्ट खरीददारी और निवेश के अवसरों के लिए अमेरिका का रुख करने लगी हैं।"
बयान में कहा गया है कि यह बहु-वर्गीय प्रतिनिधिमंडल उन अहम क्षेत्रों पर गौर कर रहा है जिनमें अमेरिका और भारत के कारोबारियों में व्यापक भागीदारी, सहयोग और आर्थिक समझौते हो सकते हैं।
दलाई लामा को उम्मीद, मनमोहन उठाएंगे तिब्बत का मसला :
दलाई लामा ने नई दिल्ली में कहा, "भारतीय प्रधानमंत्री बेहद ईमानदार इंसान और बेदाग राजनीतिज्ञ हैं। भारत और तिब्बत में बेहद करीबी आध्यात्मिक रिश्ते हैं। मुझे यकीन है कि ओबामा से प्रधानमंत्री जैसी भी संभव होगा, अपील करेंगे।" दलाई लामा ने यह बात मनमोहन सिंह की अमेरिका यात्रा से उनकी उम्मीदों के बारे में पूछे जाने पर कही।
दलाई लामा ने यहां साकेत में मैक्स हॉस्पिटल परिसर में कैंसर केंद्र के उद्घाटन के मौके पर कहा, "मुझे कोई चिंता नहीं है, लेकिन मैं समझता हूं कि उन्हें व्यावहारिक और यथार्थवादी बनना होगा। भारत सरकार और अमेरिका की सरकार की कुछ सीमाएं हैं और यह एक सच्चाई है।"
इसी सप्ताह के आरंभ में अपनी इटली यात्रा के दौरान दलाई लामा ने ओबामा द्वारा चीन से तिब्बत मसले पर उनसे बातचीत का आग्रह करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा, "भारत सरकार और हम तिब्बत को चीन का स्वायत्त क्षेत्र मानते हैं। राष्ट्रपति ओबामा ने इस मसले पर अवश्य ही चीन के नेताओं से गंभीर वार्ता की होगी और मैं इसकी सराहना करता हूं।"
बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय में तिब्बत इतिहास और संस्कृति के बारे में अपने संबोधन में दलाई लामा ने कहा कि उन्हें दुनिया भर में तिब्बत के दलाई लामा के रूप में जाना जाता है। उन्हें कोई भी चीन का दलाई लामा नहीं कहता, जबकि चीन उन्हें चीन के तिब्बत का दलाई लामा कहता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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