हड़ताली जूानियर डॉक्टरों की हड़ताल 12वें भी जारी
इधर, अस्पताल प्रशासन ने हड़ताली जूनियर डॉक्टरों द्वारा चलाये जा रही ओपीडी को भी बंद करवा दिया है। उधर, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का दावा है कि पिछले दो दिनों में इस ओपीडी 800 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया। हड़ताल के दौरान अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) तथा बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने भी जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल वापस लेने को कहा है।
पीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ़ आऱ क़े सिंह ने शनिवार को कहा कि हड़ताल में शामिल जूनियर डॉक्टर पिछले दो दिन से परिसर में ओपीडी चला रहे थे जो गलत था। इस कारण उसे बंद करवा दिया गया।
इधर, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रवक्ता नकी इमाम ने कहा कि अस्पताल प्रशासन नहीं चाहता है कि मरीजों का इलाज हो। उन्होंने कहा कि हमलोग मानवता का ख्याल कर ओपीडी चला रहे थे। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
इधर, आईएमए तथा भासा ने भी जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की अपील की है। दोनों संघों ने हड़ताली जूनियर डॉक्टरों को आश्वासन दिया है कि वे राज्य मानवाधिकार आयोग से गुहार लगायेंगे कि उनके खिलाफ कार्रवाई ना की जाये। आईएमए के राज्य अध्यक्ष रमेश प्रसाद ने शनिवार को कहा कि वे जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ मानवाधिकार आयोग से कोई करवाई नहीं करने की अपील करेंगे।
जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के बाद दोंनों अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या घट गई है तथा भर्ती मरीजों का पलायन जारी है।
ज्ञात हो कि राज्य मानवाधिकार आयोग ने हड़ताली चिकित्सकों के प्रति सख्त रवैया अपनाते हुए उन पर अपराधिक मुकदमा दर्ज करने और हड़ताल अवधि में इलाज के अभाव में मरे मरीजों के परिजनों को मुआवजा देने का सरकार को निर्देष दिया है।
उल्लेखनीय है कि पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों गत नौ नवंबर से तथा डीएमसीएच के गत 12 नवंबर से अपना मानदेय13,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 से 30,000 तक करने की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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