रोहतांग त्रासदी : 9 शवों को आधार शिविर लाया गया (लीड-2)
प्रशासन ने यहां से 35 किलोमीटर दूर मरही में आधार शिविर स्थापित किया है।
कुल्लू के पुलिस अधीक्षक के.के.इंदौरिया ने आईएएनएस को बताया, "अटल बिहारी बाजपेयी पर्वतारोही संस्थान और जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग बल (जीआरईएफ) के संयुक्त बचाव दल और पुलिस ने रोहतांग दर्रे के पास बर्फ में दबे नौ शवों को शनिवार को खोज निकाला।"
इंदौरिया ने कहा कि शवों का पोस्टमार्टम मनाली में रविवार को किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इलाके में तलाशी अभियान अभी जारी है। शवों को खोजने का अभियान शनिवार सुबह शुरू किया गया था।
उप आयुक्त बी.एम. नान्टा ने कहा कि पीड़ितों में अधिकतर झारखण्ड के श्रमिक हैं। उन्होंने कहा कि संभवत: ये लोग या तो तेज हवाओं की वजह से बर्फीले रास्ते से भटक गए या फिर कड़ाके की ठंड की वजह से इनकी मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि तलाशी अभियान अगले तीन-चार दिनों तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को रोहतांग दर्रे से पहुंचे 19 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में रोहतांग दर्रे के समीप जीआरपीएफ के 75 से अधिक श्रमिक शुक्रवार को बर्फीली हवाओं की चपेट में आ गए। श्रमिक लाहौल घाटी से आ रहे थे।
इस दौरान नौ लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी जबकि बाकी लोग जान बचाने में सफल हो गए थे। ये सभी लोग पिछले 11 दिनों से बर्फबारी की वजह से घाटी में फंसे हुए थे।
भारी बर्फबारी की वजह से रोहतांग दर्रे को पिछले 9 नवंबर से यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। रोहतांग दर्रे को लाहौल घाटी का दरवाजा कहा जाता है और यह मनाली को लेह (जम्मू एवं कश्मीर) से जोड़ता है। यह सेना के आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लद्दाख जाने के लिए सैनिक इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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