रक्ताधान को सुरक्षित बनाने के लिए रक्त की विशेष जांच की वकालत
चिकित्सकों ने एक अध्ययन में पाया है कि रक्त परीक्षण की वर्तमान प्रणाली खतरनाक हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि न्यूक्लिक एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्ट (एनएटी) इन वायरसों का पता लगाने की प्रक्रिया को ज्यादा सटीक और सुरक्षित बनाएगा। रक्त जांच की यह प्रणाली यूरोप, अमेरिका और सिंगापुर, थाइलैंड व मलेशिया जैसे एशियाई देशों में आम है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में ब्लड बैंक की प्रभारी कविता चटर्जी ने संवाददाताओं को बताया, "उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2000 में दिए गए आदेश के अनुसार दाता के खून में संक्रमण की जांच के लिए ईएलआईएसए परीक्षण प्रणाली का प्रयोग में लाई जाती है। लेकिन इस प्रणाली के तहत रक्त में वायरस का पता तभी लगाया जा सकता है, जब वह एक निश्चित सीमा तक रक्त में अपना विस्तार कर ले।"
चटर्जी ने कहा कि नेट पद्धति के
जरिए आनुवंशिक वायरस के प्रसार होने से पहले ही उसे पकड़ा जा सकता है। यह एक आणविक परीक्षण है।
कविता चटर्जी ने हेपेटाइटिस बी और सी तथा एचआईवी का पता लगाने के लिए देश के 5,818 दाताओं के खून के नमूनों का परीक्षण किया जिसमें नेट के जरिए पांच लोगों के रक्त के नमूनों में संक्रमण का पता चला, जबकि इएलआईएसए की जांच में इसका पता नहीं लग सका था।
चटर्जी ने कहा कि वायरस की संभावनाओं का पता लगाने के लिए यह एक सर्वोत्तम जांच प्रणाली है।
गौरतलब है कि एक सरकारी अस्पताल में ईएलआईएसए जांच की फीस 15 रुपए हैं वहीं नेट की फीस 800 रुपए है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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