'सूचना अधिकार अधिनियम में संशोधन अलोकतांत्रिक'
सूचना के अधिकार अभियान के लिए काम कर रही संस्था 'जवाब' के समन्वयक सौरभ ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि यह संशोधन जनता के मौलिक अधिकारों को छीनने जैसे है। उन्होंने कहा कि जब लोग सूचना ही नहीं पाएंगे तो वे अपने अधिकार को कहां व्यक्त कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस संशोधन से लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी छीनी जा रही है। संस्था इस संशोधन के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
बिहार सूचना अधिकार मंच की संयोजक परवीन अमानुल्लाह ने कहा कि राज्य सरकार ने सूचना अधिकार अधिनियम में जो संशोधन किया है वह गैरकानूनी है। राज्य सरकार संसद के कानून को मनमाने ढंग से संशोधित कर रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक अब आवेदक को एक सूचना 10 रुपये में मिलेगी। साथ ही आवेदक को सूचना पाने के लिए टिकट लगा लिफाफा देना होगा।
उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों को भी अब पैसा देना होगा जबकि सूचना अधिकार अधिनियम कानून में कहा गया है कि गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को सूचना पाने के लिये कोई शुल्क नहीं देना होगा।
अधिकार अभियान के रूपेश कुमार ने कहा कि नीतीश सरकार द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम में संशोधन गैर कानूनी तथा अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सूचना अधिकार अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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