गन्ना मूल्य पर राजनीति कर रही है केंद्र सरकार : मायावती

लखनऊ, 21 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि राजनीतिक फायदे के लिए गन्ना मूल्य से संबंधित अध्यादेश को वापस लेने में उसने जानबूझकर देरी की।

बसपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने शुक्रवार देर रात मायावती की ओर से जारी एक बयान में कहा केंद्र सरकार ने फेयर एंड रिम्युनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) व्यवस्था वापस लेने में जानबूझकर विलंब किया है, जो गन्ना किसानों की सभी समस्याओं की जड़ है।

मौर्य ने कहा, "यह साफ है कि केंद्र सरकार ने उसे स्वीकार किया, जिसकी मांग मायावती जी की ने एक पखवाड़े पहले की थी। परंतु कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार इसका श्रेय बसपा को नहीं लेने देना चाहती थी, इसलिए उसने तनाव को बढ़ने दिया।"

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के इस कदम से राज्य में कानून और व्यवस्था को कायम रखने में समस्या पैदा हुई।

मौर्य ने कहा कि सबसे पहले उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री ने ही अध्यादेश के माध्यम से 23 अक्टूबर को लाई गई 129 रुपये प्रति क्विंटल वाली एफआरपी व्यवस्था के खिलाफ प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

मौर्य ने कहा कि उनकी सरकार ने पहले ही राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) के तहत गóो की कीमत 165 रुपये और 170 रुपये प्रति क्विंटल घोषित की थी। यह पिछले वर्ष के मूल्य से 25 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला करते हुए मौर्य ने कहा कि राज्य में इन दलों के शासनकाल में ही गन्ना किसानों का सबसे अधिक शोषण हुआ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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