शिव सैनिकों का मुंबई, पुणे में टीवी चैनल के दफ्तरों पर हमला, 4 कर्मचारी घायल (लीड-2)
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
चैनल के एक कर्मचारी के मुताबिक बल्लों व हॉकियों से लैस तकरीबन 20 कार्यकर्ताओं का एक समूह शाम को लगभग चार बजे चैनल के कार्यालय पहुंचा और वहां लगे फर्नीचर, कांच की दीवारों तथा आउटडोर ब्रॉडकास्ट वैन तथा अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर दिया। सभी कार्यकर्ता शिव सेना अध्यक्ष बाल ठाकरे के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे।
चैनल के संपादक निखिल वागले के अलावा तीन अन्य कर्मचारी इस हमले में घायल हो गए। वागले ने कहा कि कुछ सेना कार्यक र्ताओं ने पत्रकारों और अन्य कर्मचारियों पर निर्दयता के साथ हमला किया।
वागले ने पत्रकारों को बताया, "यह हमला पूर्वनियोजित था। वे लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस होकर आए थे। हमलावरों ने मेरे ऊपर एक कुर्सी दे मारी।"
शिव सेना ने शुक्रवार देर शाम इस हमले की जिम्मेदारी ले ली। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक पार्टियों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है।
मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने शुक्रवार की शाम पत्रकारों को बताया, "सरकार शिव सेना के साथ कोई रियायत नहीं बरतेगी और मीडिया को भी शिव सेना का बहिष्कार करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस ने सात और पुणे पुलिस ने आठ हमलावर शिव सैनिकों को गिरफ्तार किया है।
दूसरी ओर शिव सेना प्रवक्ता संजय राउत ने चैनल पर क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर पर बाल ठाकरे की टिप्पणी को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है।
राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा, "यह पूरे मीडिया पर हमला नहीं है। आईबीएन-लोकमत चैनल बाल ठाकरे और शिव सेना के बारे में लगातार गलत खबरें प्रसारित कर रहा है। हम अपने पार्टी प्रमुख की आलोचना बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
इस बीच लोकमत समाचार समूह के अध्यक्ष विजय दरडा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "इन कार्यकर्ताओं ने संपादक निखिल वागले और कुछ महिलाओं सहित अन्य कर्मचारियों के साथ बदसलूकी भी की।"
उन्होंने कहा, "यह प्रेस की आजादी पर हमला है।" दरडा ने कहा कि उन्हें शिव सेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से यह उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा उन्हें एक सुसंस्कृत और पारिवारिक व्यक्ति समझा, लेकिन आज जो कुछ भी हुआ उससे मुझे गहरा धक्का लगा है।"
उन्होंने कहा कि उनके चैनल ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिव सेना गठबंधन की हार पर कई खबरें चलाईं थी। उन्होंने अपनी हार का गुस्सा पत्रकारों और चैनल पर उतारा है। इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है।
दक्षिण मुंबई के सांसद मिलिंद देवड़ा ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस को उन शीर्ष सेना नेताओं की जांच करनी चाहिए, जिन्होंने मुंबई और पुणे में मीडिया के कार्यालयों पर हमले की साजिश रची।
लोकमत अखबार समूह के समूह संपादक डी. के. रायकर ने कहा कि इस हमले का तात्कालिक कारण समझ में नहीं आ रहा है। इसी प्रकार का एक और हमला अखबार के पुणे कार्यालय पर भी हुआ।
उधर, लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी इस हमले की निंदा की। पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा, "चाहे शिव सेना हो या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे), सभी समाज विरोधी हैं। ये पार्टियां देश के विभिन्न राज्यों के बीच क्षेत्रीयता की घृणा फैला रही हैं।"
उन्होंने कहा, "हम चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि वह ऐसे राजनीतिक दलों की मान्यता समाप्त कर दे, जो संविधान का पालन नहीं करते।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications