गóो के मूल्य पर सरकार झुकी, विपक्ष संतुष्ट (लीड-2)
संसद भवन में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के घटक दलों की बैठक में सरकार ने गन्ना मूल्य (नियंत्रण) अध्यादेश से विवादित अंश को हटाने का फैसला किया, जिसके तहत राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) और फेयर एंड रिम्युनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) के बीच के अंतर का भुगतान राज्य सरकारों से करने को कहा गया था, लेकिन राज्य सरकारें इसके लिए बाध्य नहीं थी।
इस बैठक के बाद फैसले के बारे में अन्य दलों के नेताओं को सूचित किया गया।
संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने कहा कि अध्यादेश में शामिल कुछ प्रावधानों को लेकर कुछ गलतफहमियां पैदा हो गई थीं।
उन्होंने कहा, "गलतफहमियों को खत्म करने के लिए संबंधित प्रावधान को खत्म करने की बात कही गई है। इसके साथ ही यदि राज्य सरकार एसएपी की घोषणा करती है तो मिल मालिकों की यह जिम्मेदारी होगी कि वह किसानों को एसएपी का भुगतान करें।"
उन्होंने कहा कि यूपीए के नेताओं की बैठक में लिए गए फैसले के बारे में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने विपक्षी नेताओं के साथ बैठक में उन्हें जानकारी दी।
बंसल ने स्पष्ट किया कि इस अध्यादेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसानों को गóो का उचित और सही दाम मिले लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसले को देखते हुए लेवी की चीनी का दाम तय करना और सरकार द्वारा उठाए गए कदम की पुष्टि करना जरूरी था।
बैठक के बाद राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह ने कहा कि पूर्व की गन्ना मूल्य नीति फिर लागू की गई है जिसके तहत गóो का भाव राज्य सरकारें तय कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन खत्म हो गया है और सोमवार से संसद सुचारू रूप से चलेगी।
बैठक के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार ने राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) को लागू करने का फैसला किया है। "हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं क्योंकि इससे संविधान के संघीय ढांचे को टूटने से बचाया जा सकेगा।"
उन्होंने कहा कि इस विवादित फैसले को बदलने का वास्तविक श्रेय प्रदर्शनकारी किसानों को दिया जाना चाहिए, जिन्होंने फैसले को बदलने के लिए सरकार पर दबाव बनाया।
डीएमके के नेता टी. आर. बालू ने भी सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, "हम खुश हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications