शिव सैनिकों ने समाचार चैनल के कार्यालय में की तोड़फोड़ (लीड-1)
चैनल के एक कर्मचारी के मुताबिक बल्लों व हॉकियों से लैस तकरीबन 20 कार्यकर्ताओं का एक समूह शाम को लगभग चार बजे चैनल के कार्यालय पहुंचा और वहां लगे फर्नीचर, कांच की दीवारों तथा आउटडोर ब्रॉडकास्ट वैन तथा अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर दिया। सभी कार्यकर्ता शिव सेना अध्यक्ष बाल ठाकरे के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे।
लोकमत समाचार समूह के अध्यक्ष विजय दर्डा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "इन कार्यकर्ताओं ने संपादक निखिल वागले और कुछ महिलाओं सहित अन्य कर्मचारियों के साथ बदसलूकी भी की।"
उन्होंने कहा, "यह प्रेस की आजादी पर हमला है।" दर्डा ने कहा कि उन्हें शिव सेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से यह उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा उन्हें एक सुसंस्कृत और पारिवारिक व्यक्ति समझा लेकिन आज जो कुछ भी हुआ उससे मुझे गहरा धक्का लगा है।"
उन्होंने कहा कि उनके चैनल ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिव सेना गठबंधन की हार पर कई खबरें चलाईं थी। उन्होंने अपनी हार का गुस्सा पत्रकारों और चैनल पर उतारा है। इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है।
लोकमत अखबार समूह के समूह संपादक डी. के. रायकर ने कहा कि इस हमले का तात्कालिक कारण समझ में नहीं आ रहा है। इसी प्रकार का एक और हमला अखबार के पुणे कार्यालय पर भी हुआ। पुणे पुलिस ने इस सिलसिले में आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और गृह मंत्री आर. आर. पाटिल ने भी हमले की निंदा की है और यह आश्वासन दिया है कि दोषियों को हर हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
उधर, लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी इस हमले की निंदा की। पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा, " चाहे शिव सेना हो या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे), सभी समाज विरोधी हैं। ये पार्टियां देश के विभिन्न राज्यों के बीच क्षेत्रीयता की घृणा फैला रही हैं।"
उन्होंने कहा, "हम चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि वह ऐसे राजनीतिक दलों की मान्यता समाप्त कर दे, जो संविधान का पालन नहीं करते।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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