अंग्रेजी के इस्तेमाल में पिछड़ रहा है भारत

ब्रिटेन के अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंधों की संस्था 'ब्रिटिश काउंसिल' द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक शिक्षकों और गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की 'भारी कमी' का मतलब है कि अब चीन में भारत की अपेक्षा अधिक लोग अंग्रेजी बोल सकते हैं।

अध्ययन के अनुमान के मुताबिक भारतीय जनसंख्या का पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सा अंग्रेजी बोलता है, जिसका मतलब है कि 2010 तक भारत के केवल 5.5 करोड़ लोग ही धाराप्रवाह अंग्रेजी बोल सकेंगे।

तुलनात्मक रूप से चीन की नई शिक्षा नीतियों के परिणामस्वरूप यहां पर हर साल अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या में दो करोड़ की वृद्धि होती है। ब्रिटिश काउंसिल द्वारा पूर्व में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक 1995 में चीन में 20 करोड़ लोग अंग्रेजी का इस्तेमाल करते थे।

भारत के अंग्रेजी शिक्षित श्रमिकों की वजह से उसका एक प्रमुख सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरना संभव हो सका है लेकिन अध्ययन के मुताबिक भारतीय शिक्षा की विभिन्न समस्याओं का कारण अंग्रेजी है।

ब्रितानी लेखक डेविड ग्रेडॉल ने इस अध्ययन की रपट लिखी है। अध्ययन के मुताबिक "भारत को अन्य देशों से पीछे जाने से बचाने के लिए वर्तमान में भारतीय लोगों की अंग्रेजी भाषा का कौशल विकसित करने की दर बहुत धीमी है जबकि अन्य देशों में प्राथमिक स्तर पर ही सफलता से अंग्रेजी की शिक्षा देना शुरू कर दिया जाता है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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