पाक को भारत से डरने की जरूरत नहीं : प्रधानमंत्री

अपनी चार दिन की अमेरिका यात्रा से पहले सिंह ने 'वाशिंगटन पोस्ट' अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ सभी मसले सुलझाने के लिए तैयार है बशर्ते कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे। यह साक्षात्कार समाचार पत्र के रविवार के अंक में प्रकाशित होगा। प्रधानमंत्री उसी दिन वहां पहुंचेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पिछले 25 साल से पाकिस्तान के उकसावे, समर्थन और उससे प्रेरित आतंकवाद का शिकार बनता आया है। उन्होंने कहा कि अब भी ऐसी खुफिया सूचनाएं मिल रही हैं कि पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी भारत को पिछले साल के मुंबई हमलों की तरह फिर से निशाना बनाने की फिराक में हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक मुंबई हमलों का सवाल है, तो उसके दोषियों के खिलाफ पाकिस्तान ने कुछ कदम उठाए हैं लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं।

सिंह ने कहा, "मुझे रोजाना ऐसी खुफिया सूचनाएं मिलती हैं कि पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी उसी तरह के हमले करने की फिराक में हैं।" उन्होंने कहा कि भारत चाहेगा कि अमेरिका पाकिस्तान को इस रास्ते से हटाने के लिए अपने प्रभाव का पूरा इस्तेमाल करे। उन्होंने कहा, "वैसे पाकिस्तान को भारत से डरने की कोई जरूरत नहीं है। यह त्रासद है कि पाकिस्तान ऐसे मुकाम तक आ पहुंचा है जहां आतंक उसकी नीति का हिस्सा बन चुका है।"

पाकिस्तान में आतंकवादी हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां के बहुत से हिस्सों पर आतंकवादी अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं और वे भारत की सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। उन्होंने कहा, "किसी समय पाकिस्तान के संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्र (एफएटीए) तक सीमित रहे तालिबान और अल-कायदा जैसे आतंकवादी उसके मुख्य हिस्सों तक आ पहुंचे, तो मुझे लगता है कि इसके हमारी सुरक्षा के लिए भी बहुत गंभीर नतीजे होंगे।"

उन्होंने कहा, "हम हरगिज नहीं चाहेंगे कि आतंकवाद ऐसी जगह कमान संभाले जहां नागरिक सरकार बस कहने भर को ही हो। मैं यह नहीं कहता कि यह स्थिति अभी बन चुकी है लेकिन जाहिर तौर पर तालिबान और अल कायदा ने पाकिस्तान के कई हिस्सों पर पकड़ तो मजबूत कर ही ली है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान से यदि अमेरिका अपनी फौजें हटा लेगा तो वहां गृहयुद्ध भड़क सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान के मसले पर अमेरिका और पाकिस्तान के उद्देश्यों में एकरूपता नहीं है। सिंह ने कहा कि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पूरी तरह समर्पित नहीं है।

यह पूछे जाने पर वह अमेरिका में क्या हासिल करना चाहते हैं, सिंह ने कहा, "परमाणु सहयोग, शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग, दोनों देशों के विश्वविद्यालयों में करीबी संपर्क, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग-एकजुट होकर नए टीकों का विकास करना।"

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रथम राजकीय अतिथि हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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