गन्ना किसानों के प्रदर्शन के बाद सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई (राउंडअप)
सरकार ने नई गन्ना मूल्य नीति की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर इसमें संशोधन करने की भी बात कही है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्री और लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर सोमवार को बैठक के लिए आमंत्रित किया है।
सूत्रों के अनुसार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के एक महत्वपूर्ण सहयोगी डीएमके के इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ जाने की संभावना और कीमतों पर किसानों के असंतोष पर राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चर्चा के बाद यह कदम उठाया गया है।
गóो की कीमतों पर असंतोष के कारण शीतकालीन सत्र के पहले दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही भी स्थगित हो गई।
हाथों में गन्ना लिए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए हजारों की संख्या में किसान राजधानी के रामलीला मैदान से रैली के रूप में जंतर मंतर पहुंचे। किसानों के सैलाब ने मानो दिल्ली की रफ्तार ही थाम ली। हर जगह जाम लगा और लोग परेशान हुए। किसानों के आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने लोगों को सलाह दी थी कि वे मध्य दिल्ली से दूर रहें।
किसानों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में गुरुवार को चीनी मिलों में तोड़फोड़ भी की तथा वहां रखे कागजात और फर्नीचर को आग के हवाले कर दिया।
जिले के खतौली, सिसौली, भौंराकलां, ऊन, मंसूरपुर और तेताना स्थित चीनी मिलों में गुरुवार को आक्रोशित किसानों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने पुलिस के साथ हाथापाई भी की। काफी मशक्कत के बाद पुलिस उन्हें वहां हटाने में कामयाब रही।
खतौली के थाना प्रभारी अजय कुमार गौतम ने आईएएनएस को बताया कि किसानों के उग्र आंदोलन को देखते हुए जिले के सभी चीनी मिलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इधर, संसद में भी सरकार परेशान दिखी। समूचा विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट हो गया। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) जैसी सरकार की सहयोगी पार्टी भी इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ दिखी।
विपक्ष ने गन्ना किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए लोकसभा में हंगामा किया। जिसके चलते शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी। लोकसभा अध्यक्ष को शुक्रवार सुबह तक सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मामले की गंभीरता देख प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ एक आपात बैठक की। संसद भवन में हुई इस बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली, कृषि मंत्री शरद पवार और गृह मंत्री पी. चिदंबरम शामिल हुए। बैठक में लिए गए फैसले के बारे में पूछे जाने पर मंत्रियों ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।
इस बीच, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार गन्ना किसानों की समस्याओं पर गौर करेगी और जरूरत पड़ी तो किसानों के हित में फेयर एंड रिम्युनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) अध्यादेश में संशोधन भी करेगी।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने गुरुवार शाम एक बयान जारी कर कहा कि राहुल गांधी ने आज सुबह प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उन्हें गन्ना किसानों की भावनाओं से अवगत कराया।
बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री ने राहुल को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार गन्ना किसानों की समस्याओं पर गौर करेगी और जरूरत पड़ी तो किसानों के हित में फेयर एंड रिम्युनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) अध्यादेश में सुधार भी किया जाएगा।
दिग्विजय सिंह ने कहा, "कांग्रेस सभी गन्ना किसानों से अपील करती है कि वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की किसान हितैषी नीतियों पर भरोसा रखे। हम उन्हें भरोसा दिलाना चाहते हैं कि मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए गóो की कीमतों में हर संभव वृद्धि की जाएगी।"
उधर, संसद की कार्यवाही स्थगित कराने के बाद समूचा विपक्ष जंतर मंतर पर एकत्रित हुआ और यहां राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) द्वारा आयोजित गन्ना किसानों की रैली में हिस्सा लिया।
रैली में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण जेटली, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेव आचार्य, रालोद नेता अजित सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) नेता डी. राजा व गुरुदास दास गुप्ता और सपा नेता अमर सिंह भी मौजूद थे।
शरद यादव ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह अकेले गन्ना किसानों की लड़ाई नहीं है बल्कि यह सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ रही लेकिन किसानों की उपज सस्ती दरों पर खरीदी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 62 वर्षो में किसी भी सरकार ने ऐसा नहीं किया जैसा केंद्र की यह कांग्रेस सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है।
राजधानी में किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले अजीत सिंह ने कहा, "उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती पूरी तरह से डीजल पर निर्भर है और डीजल का मूल्य आसमान छू रहा है। ऐसे परिदृश्य में यदि किसानों को अपने उत्पाद के लिए उचित मूल्य नहीं मिलता है तो उनका विरोध पूरी तरह से न्यायोचित है।" उन्होंने कहा कि देश में चीनी के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा केवल उत्तर प्रदेश से आता है।
रैली में शामिल एक किसान ने कहा, "हम अपने अधिकारों के लिए अंत तक लड़ेंगे। यदि हमें अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता है तो हम दिल्ली में अनाज नहीं आने देंगे और प्रदेश में दूध, सब्जियां और अनाज लेकर आने वाली सभी गाड़ियों को रोक देंगे।"
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा गóो का समर्थन मूल्य 165 रुपये प्रति क्विंटल व केंद्र सरकार द्वारा उससे भी कम 129.85 रुपये प्रति क्विंटल तय करने और उचित एवं लाभकारी मूल्य व्यवस्था (एफआरपी) तय करने का किसान विरोध कर रहे हैं। गन्ना किसान प्रति क्विंटल 280 रुपये से ज्यादा के समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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