सुरक्षा परिषद में भारत के दावे का समर्थन कर सकता है अमेरिका (लीड-1)
वाशिंगटन, 19 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अमेरिका के आगामी राजकीय दौरे का स्वागत किया। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि दौरे के दौरान ओबामा प्रशासन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के दावे के समर्थन की घोषणा कर सकता है।
हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने बुधवार को ध्वनिमत से पारित एक प्रस्ताव में कहा, "दुनिया भर में शांति, स्थायित्व, लोकतंत्र और समृद्धि को बढ़ावा देने में भारत और अमेरिका के रिश्तों में अपार संभावनाएं हैं।"
प्रस्ताव में कहा गया है कि परस्पर महत्व और हित वाले क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व मुहैया कराने के लिए दोनों देशों में एक साथ मिलकर काम करने की क्षमता को बढ़ावा देने की सामथ्र्य भी मौजूद है।
प्रस्ताव में कहा गया है मनमोहन सिंह ने बाजार अर्थव्यवस्था के विस्तार को अनुमति देने के लिए भारत की आर्थिक नतियों को आकार देने में मदद की है। ये नीतियां भारत की व्यापक आर्थिक समृद्धि और मध्यम वर्ग की तरक्की का सबब बनी हैं।
इस प्रस्ताव का प्रायोजन अमेरिकी कांग्रेस में भारत और भारतीय अमेरिकियों की समर्थक लॉबी के डेमोक्रेट सदस्य जिम मैकडर्मोट और रिपब्लिकन सदस्य एड रॉयस और सह-प्रायोजन मध्य-पूर्व तथा दक्षिण एशिया मामलों पर सदन की उपसमिति के डेमोक्रेट अध्यक्ष गैरी ऑकरमैन तथा समिति के वरिष्ठ रिपब्लिकन सदस्य डेन बर्टन ने किया है।
उधर अमेरिकी के राजनीतिक मामलों के विदेश राज्य मंत्री विलियम जे. बर्न्स ने कहा, "आप सभी जानते हैं कि भारत एक उभरती वैश्विक ताकत है, जो जल्दी ही 10 खरब डॉलर से ज्यादा की अर्थव्यवस्था वाला और सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश भी होगा।"
वाशिंगटन की प्रमुख संस्था कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में अपने संबोधन में बर्न्स ने कहा, "यह इत्तफाक है कि ओबामा प्रशासन में प्रथम राजकीय यात्रा भारत के प्रधानमंत्री की होने जा रही है। मनमोहन सिंह की अगले सप्ताह होने वाली यात्रा महान अवसर प्रदान करेगी।"
उन्होंने कहा, "दुनिया भर में कुछ ही रिश्ते हमारे साझा भविष्य के लिए इससे ज्यादा अहम होंगे।"
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों ने एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने कहा, "आज अमेरिका में करीब 30 लाख भारतीय मूल के अमेरिकी हैं, जो दोनों देशों को जोड़ने का काम करते हैं।"
बर्न्स ने कहा, "एक लाख से ज्यादा भारतीय छात्र हर साल अमेरिकी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा अर्जित करते हैं। यह संख्या किसी भी अन्य देश के छात्रों से ज्यादा है। भारत में हमारे दूतावास और वाणिज्य दूतावासों ने 50 प्रतिशत से ज्यादा वीजा विशेष दक्षता प्राप्त पेशेवरों को जारी किए हैं, जो दुनिया भर में किसी भी देश के लिए जारी किए सर्वाधिक वीजा हैं।"
उन्होंने कहा, "हमारे निजी क्षेत्र निरंतर बढ़ते व्यापारिक संबंधों से संबद्ध हैं जो वर्ष 2004 से दोगुना बढ़ने के बाद अब 43 अरब डॉलर की दर से सालाना बढ़ रहे हैं।"
आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में दोनों देशों के बीच सहयोग के बारे में बर्न्स ने कहा, "हमले रोकने तथा अपने देशों की जनता की हिफाजत के लिए पिछले साल भर से दोनों देशों ने सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर बनाने के लिए एक नया तंत्र विकसित किया है।"
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री पी. चिदंबरम की गत सितंबर में हुई अमेरिका यात्रा ने इन क्षेत्रों में हमारे संबंधों को और प्रगाढ़ किया है और आतंकवाद से निपटने में अमेरिका-भारत की भागीदारी की बुनियाद रखी है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति बहाल करने के लिए अमेरिका भारत के साथ सक्रिय रूप से विचार विमर्श करता रहेगा, "हम अफगानिस्तान में भारत की महत्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका का स्वागत करते हैं।"
भारत-पाकिस्तान शांति प्रक्रिया में किसी भी किस्म की मध्यस्थता से इंकार करते हुए बर्न्स ने कहा, "यकीनन भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिरता और शांति हमारे हित में है। अमेरिका ने हमेशा दोनों देशों की शांति प्रक्रिया और विवादित मसलों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है।"
उन्होंने कहा कि दोनों देशों में रक्षा सहयोग में विस्तार की भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। भारत अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है और इसमें अमेरिकी साजो-सामान और प्रौद्योगिकी अहम भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि परमाणु अप्रसार ओबामा प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मसला है और इसे मजबूती देने की दिशा में हम भारत को अहम सहयोगी मानते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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