गैस विवाद में सरकार को पक्ष बनाने पर आरएनआरएल सशर्त सहमत

आरएनआरएल के वकील राम जेठमलानी ने पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से अदालत में उपस्थित हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम को सुनने के बाद अपनी सहमति दी। सुब्रमण्यम ने आरआईएल के साथ एक अन्य मामले में सार्वजनिक कंपनी एनटीपीसी के हितों के संरक्षण में सरकार द्वारा नरमी बरते जाने के पूर्वाग्रह को समाप्त करने की कोशिश की।

जेठमलानी ने कहा, "उनके तर्को को सुनने के बाद मैंने सरकार को एक पक्ष बनाने पर अपनी सहमति देने का फैसला किया है लेकिन पूछताछ करने के अपने अधिकार को छोड़े बिना।"

प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन, न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश पी. सथशिवम की खंडपीठ के समक्ष जेठमलानी ने कहा, "मैं अपनी सहमति इसलिए नहीं दे रहा हूं कि यह उनका अधिकार है बल्कि मैं सरकार की ओर से अगले मुकदमेबाजी से बचना चाहता हूं।"

जेठमलानी ने मंत्रालय के शपथपत्र को भी रिकार्ड में शामिल करने की सहमति दी। इससे पहले उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान शपथपत्र के रूप में नए साक्ष्यों को पेश करने का विरोध किया था।

उन्होंने कहा, "मामले को संक्षिप्त करने के लिए इस शपथपत्र को रिकार्ड में शामिल किया जाए।" उन्होंने आगे कहा, "हमारे पास सवाल जवाब करने का अनिवार्य अधिकार है।"

अदालत आंध्र प्रदेश के कृष्णा गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस के बंटवारे की सुनवाई कर रही है। बेसिन पर अधिकार रखने वाली आरआईएल पारिवारिक समझौते के मुताबिक 2.34 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से आरएनआरएल को 17 वर्षो तक गैस की आपूर्ति करने इंकार कर रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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