कानूनी रूप से बाध्यकारी कटौती स्वीकार नहीं : जयराम रमेश
रमेश ने यहां 'स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2009' जारी करते हुए कहा, "कोपेनहेगन से बहुत ज्यादा उम्मीद न करें। हमें अब भी अपने रुख पर कायम रहना होगा।"
उन्होंने कहा, "ऐसा लग रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पर होने से पहले अभी लंबा सफर तय करना होगा।"
वैसे भी 7-18 दिसम्बर के बीच जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन में आयोजित होने वाली शिखर वार्ता में ग्लोबल वार्मिग से लड़ने के लिए कोई वैश्विक समझौता होने की संभावना नहीं है क्योंकि नुकसान के लिए जिम्मेदार अमीर देशों ने न तो नुकसान को कम करने के लिए कोई वादा किया है और न ही विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण धन दिया है।
रमेश ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कटौती की कानूनी बाध्यता की अपेक्षा भारत के लिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए घरेलू स्तर पर सक्रिय कदम उठाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, "हमें अपने घरेलू दायित्वों में सक्रिय, आक्रामक और सख्त होने की आवश्यकता है। हमें एक अलग पहचान बनाने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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