भारतीय समुदाय ने महावाणिज्य दूत को हटाने की मांग की
एफआईए ने एक वक्तव्य में कहा है कि यदि अत्री को उनके पद से जल्दी नहीं हटाया गया तो वह काले झण्डे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
एक स्थानीय व्यापारी और एफआईए के संरक्षक इफ्तेखार शरीफ का कहना है कि महावाणिज्य दूत अत्री के कृत्य को भारत के लोगों के साथ विश्वासघात के रूप में देखा जा सकता है।
भारतीय मूल के कई अमेरिकी सामुदायिक नेताओं ने पहले भी अत्री पर 'समुदाय विभाजन' का आरोप लगाया था। उनके और समुदाय के बीच तनाव उस वक्त से बढ़ गया था जब जनवरी 2008 में अत्री भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने की बजाए पाकिस्तानी समुदाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
शरीफ का कहना है, "अत्री ने न केवल भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय का निरादर किया है बल्कि हमारी देशभक्ति की भावना का भी अपमान किया है।"
एफआईए के अध्यक्ष हैदर मोहम्मद का कहना है, "वीजा देने के नियमों का उल्लंघन कर अत्री ने स्पष्ट रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम में डाला है।"
अन्य सामुदायिक नेताओं का कहना है कि कुछ महीने बाद अत्री का शिकागो में कार्यकाल समाप्त हो रहा है और वे अपने पीछे एक 'शर्मनाक विरासत' छोड़कर जा रहे हैं।
एफआईए के वक्तव्य में कहा गया है, "वह एक ऐसे सरकारी अधिकारी हैं जो पचास और साठ के दशक जैसा व्यवहार कर अतीत में जी रहे हैं। उनमें घमंड और अहंकार है जो उन्हें अमेरिका में भारत का प्रतिनिधित्व करने के अयोग्य ठहराता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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