नई गन्ना मूल्य नीति के विरोध में राजधानी में किसानों का प्रदर्शन
रामलीला मैदान से शुरू हुई किसानों की रैली में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), भारतीय किसान यूनियन टिकैत और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। यह रैली दिल्ली के केंद्र में स्थित जंतर मंतर पहुंचकर समाप्त हुई।
किसानों के आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे केंद्रीय दिल्ली से दूर रहें।
केंद्र सरकार ने फेयर एंड रिम्युनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) के तहत 2009-10 के लिए प्रति क्विंटल गन्ने का मूल्य 129.85 रुपये घोषित किया है जबकि उत्तर प्रदेश में राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) प्रति क्विंटल 165 से 170 रुपये तय किया गया है।
यदि राज्य सरकार एसएपी को एफआरपी से अधिक रखती है तो ऐसी स्थिति में मूल्य में जितना अंतर होगा उसका भुगतान सरकार को अपने खाते से करना होगा। हालांकि इसके लिए सरकार को बाध्य नहीं किया जा सकता।
किसानों की मांग है कि उनके उत्पाद के लिए प्रति क्विंटल 280 रुपये का भुगतान किया जाए।
राजधानी में किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले राष्ट्रीय लोक दल के अजीत सिंह का कहना है, "उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती पूरी तरह से डीजल पर निर्भर है और डीजल का मूल्य आसमान छू रहा है। ऐसे परिदृश्य में यदि किसानों को अपने उत्पाद के लिए उचित मूल्य नहीं मिलता है तो उनका विरोध पूरी तरह से न्यायोचित है।"
उन्होंने कहा कि देश में चीनी के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा केवल उत्तर प्रदेश से आता है।
एक अन्य किसान ने कहा, "हम अंत तक अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे। यदि हमें अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता है तो हम दिल्ली में अनाज नहीं आने देंगे और प्रदेश में दूध, सब्जियां और अनाज लेकर आने वाली सभी गाड़ियों को रोक देंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications