बेंगलुरू की हरियाली सहेजने के लिए अभियान

मैत्रेयी बरुआ

बेंगलुरू, 18 नवंबर (आईएएनएस)। भारत के प्रमुख प्रौद्योगिकी केंद्र बेंगलुरू के बाशिंदों ने इसकी 'हरी विरासत' को सहेजने का बीड़ा उठाते हुए एक खामोश 'हरित क्रांति' शुरू की है। शहर में जारी विकास संबंधी प्रक्रियाओं से यहां की हरियाली को खतरा पैदा हो गया था।

बेंगलुरू के पर्यावरण समूह 'ईको क्लब' ने एक अनूठा कार्यक्रम 'आई ओन ए ट्री' शुरू किया है। जिसके तहत एक व्यक्ति को एक पेड़ लगाने और दो साल तक के लिए उसका प्रायोजक बनने की अनुमति होगी।

अब तक 300 बेंगलुरूवासियों और नोकिया सहित कुछ कॉर्पोरेट संस्थानों ने शहर के विभिन्न स्थानों जैसे बेंगलोर यूनीवर्सिटी (बीयू) जनानाभारती कैम्पस, बैनरघाटा रोड और कनकपुरा इलाकों में 4,000 पेड़ लगाए हैं। पौध रोपने का कार्यक्रम छह महीने पहले शुरू किया गया था।

'ईको क्लब' के संस्थापक सदस्यों में से एक चिड्डालिंगा प्रसाद ने आईएएनएस से कहा, "बेंगलुरूवासियों द्वारा वृक्षों को प्रायोजित करने की अवधारणा का मकसद लोगों में पेड़ों के स्वामित्व के माध्यम से एक विशेष भावनात्मक जुड़ाव स्थापित कर उन्हें पेड़ों से जोड़ना है।"

इस कार्यक्रम के तहत एक व्यक्ति को 365 रुपये जमा कर एक पेड़ लगाने और दो साल तक के लिए उसका प्रायोजक बनने की अनुमति होगी।

प्रसाद ने बताया, "पौधे के दो साल के शुरूआती जीवन के दौरान 'ईको क्लब' प्रायोजित वृक्ष की देखभाल की जिम्मेदारी लेगा। प्रायोजक जब भी चाहे अपने पेड़ को देखने के लिए आ सकता है। लोग स्वयंसेवक के रूप में पौधे लगाने में मदद कर सकते हैं।"

'ईको क्लब' स्वैच्छिक संगठनों 'क्षिती फाउंडेशन' और 'रोटरी मिडटाउन' का संयुक्त प्रयास है। इसके सदस्यों ने बेंगलुरू में हर साल 100,000 पेड़ लगाने की योजना बनाई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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