चीनी प्रधानमंत्री से मुलाकात के साथ ओबामा के चीन दौरे का समापन (लीड-1)
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार ओबामा ने कहा, "पिछले कुछ दिनों के दौरान हमारे बीच बहुत फलदायी बातचीत हुई है।"
ओबामा ने कहा, "राष्ट्रपति हू जिन्ताओ और मेरे बीच हुई पहली बैठक में हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि हम दोनों अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक साझेदारी और संबंधों को गहरा बनाने की कोशिश करना चाहते हैं।"
ओबामा ने कहा, "जो रिश्ता कभी आर्थिक व व्यापार के मुद्दों तक सीमित था वह अब उन सभी वैश्विक मुद्दों तक विस्तारित होने जा रहा है, जिनमें अमेरिका और चीन का सहयोग महत्वपूर्ण है।"
इसके पहले मंगलवार को ओबामा और हू ने वित्त, जलवायु परिवर्तन और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर आपसी सहयोग का वादा किया था।
हू के साथ अपनी बातचीत के बाद बीजिंग के ग्रेट हाल में ओबामा ने संवाददाताओं को बताया, "हमने यहां ऐसे समय में मुलाकात की है जब अमेरिका और चीन के बीच का रिश्ता हमारे सामूहिक भविष्य के लिए कोई मायने नहीं रखता था।"
ओबामा ने कहा, "जलवायु परिवर्तन से लेकर परमाणु प्रसार और आर्थिक सुधार 21वीं शताब्दी की ऐसी प्रमुख चुनौतियां हैं जो दोनों देशों को स्पर्श करती हैं और ये चुनौतियां ऐसी हैं, जिनसे हम अकेले नहीं निपट सकते।"
इस मौके पर हू ने कहा कि वह और ओबामा इस बात पर सहमत हुए है कि अमेरिका-चीन संबंधों में वृद्धि के लिए दोनों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क जरूरी है।
दोनों पक्षों ने कहा कि हू ने अगले वर्ष अमेरिका दौरे का ओबामा का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।
एक संयुक्त घोषणा पत्र में दोनों नेताओं ने व्यापार, सैन्य संबंधों, आतंकवाद से मुकाबला, उत्तर कोरिया, ईरान, पाकिस्तान व अफगानिस्तान और अन्य कई सारे मुद्दों पर पारस्परिक सहयोग का संकल्प लिया।
बीजिंग के स्टेट गेस्ट हाउस में ओबामा से अपनी मुलाकात के दौरान जियाबाओ ने ओबामा से कहा, "यह मेरी सच्ची आशा है कि आपका यह दौरा सहयोग बढ़ाएगा और चीन-अमेरिका संबंधों को एक नई ऊंचाई तक ले जाएगा।"
ओबामा ने कहा कि अमेरिका और चीन एक-दूसरे के 'विरोधी' नहीं हैं, बल्कि दोनों देश अधिकांश मुद्दों पर समान रुख रखते हैं। यह अलग बात है कि कुछ मामलों पर दोनों के बीच मतभेद भी हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications