शीत सत्र में मंहगाई पर सरकार को घेरने की तैयारी

मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह गुरुवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के दौरान आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी।

भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने आईएएनएस से कहा, "हम दूरंसचार घोटाला, मधु कोड़ा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप, आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे।"

उधर, वाम दलों ने भी महंगाई और फायदे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर तीखे वार करने की तैयारी कर ली है।

लोकसभा में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेव आचार्य ने कहा, "हम पहले दिन ही आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाएंगे।"

इस बारे में कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद का कहना है कि सरकार आम आदमी से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है और महंगाई बढ़ने के पीछे यह भी एक कारण हो सकता है। लेकिन बिचौलियों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है।

इन सबके बीच सरकार पर 21 दिसंबर से पहले कई विधायी कार्यो को निपटाने का भी दबाव है। सत्र में चार अध्यादेशों को पारित कराने के अलावा स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण के लिए एक विधेयक और समान अवसर विधेयक को पारित करवाना है।

कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली शीत सत्र में वाणिज्यिक अदालतों के गठन के लिए विधेयक और न्यायायिक जांच विधेयक पेश करने का पहले ही संकेत दे चुके हैं।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय शिक्षा के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार को रोकने और शैक्षणिक मामलों के निपटारे के लिए न्यायाधिकरण की स्थापना को लेकर तैयार विधेयक को सदन में पेश करने के लिए मंत्रिमंडल से मंजूरी चाहता है।

सरकार इस सत्र में लिब्रहान आयोग की सिफारिशों पर क्रियान्वयन रिपोर्ट भी पेश कर सकती है।

पहले से ही कुछ विधेयक जैसे महिला आरक्षण विधेयक और मोटर वाहन संशोधन विधेयक संसद की मंजूरी के लिए पड़े हुए हैं।

आगामी सत्र में सरकार विदेशी व्यापार विकास (संशोधन) विधेयक, पेंशन कोष नियामक विधेयक और मानव अंग के अवैध करोबार पर रोक के लिए संशोधन विधेयक पेश कर सकती है।

इसके आलावा वामदल, पश्चिम बंगाल में नक्सलियों और तृणमूल कांग्रेस के बीच कथित सांठगांठ का मुद्दा उठा सकते हैं वहीं बंगाल में तृणमूल द्वारा राष्ट्रपति शासन की मांग सत्र को हंगामें पूर्ण बना सकती है।

आंतरिक कलह से जूझ रही भाजपा जमियत-उलेमा-ए-हिंद द्वारा वंदे मातरम् के खिलाफ जारी फतवे को मुद्दा बनाकर सदन की कार्यवाही बाधित कर सकती है। वह स्पेक्ट्रम आवंटन में दूरसंचार मंत्री पर लगे आरोपों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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