किसान आंदोलन दिल्ली पहुंचा, टिकैत की सरकार को चेतावनी
अपनी मांगों को लेकर संसद मार्ग पर टिकैत देश भर से आए किसानों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। वह कहते हैं कि कांग्रेसनीत केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार किसानों के प्रति संवेदनशून्य हो गई है। उसके पास किसानों का दर्द सुनने और समझने का समय नहीं है।
टिकैत ने बुधवार को आईएएनएस से एक विशेष बातचीत में कहा, "जब तक हमारी मांगें मान ली नहीं जाती तब तक हम यही बैठे रहेंगे। हम अपना हक ले जाने आए हैं। गुरुवार को तो संसद का घेराव करेंगे। संसद के अंदर भी सरकार को घेरा जाएगा। वहां जो किसान नेता हैं, वह सरकार पर हमला बोलेंगे।"
यह पूछे जाने पर कि फिर भी यदि सरकार ने आपकी मांगें नहीं मानी तो आपका अगला रुख क्या होगा, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "आज किसानों के जो हालात हैं कुछ भी कहा नहीं जा सकता कि क्या होगा। हम सहन करते जा रहे हैं। सहनशक्ति जिस दिन खत्म हो जाएगी उस दिन हालात बेकाबू हो जाएंगे। फिर तो वह संभाले नहीं संभलेगा।"
टिकैत कहते हैं, "24-25 नवंबर के बाद हमारा आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। फिर स्थिति मेरे नियंत्रण में भी नहीं रहेगी।"
वह कहते हैं, "सरकार किसानों को लेकर कितनी संवेदनहीन हो गई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने अभी तक हमारी सुध नहीं ली। न तो सरकार का कोई मंत्री आया न ही उसका कोई प्रतिनिधि आया। दरअसल, उत्पादों की कीमतें अब उद्योगपति तय कर रहे हैं। किसानों को तो अपने उत्पाद की कीमत तय करने का हक नहीं रहा।"
उल्लेखनीय है कि एफ एंड पी अध्यादेश के मुताबिक गóो की उचित व लाभांश कीमत तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। पहले यह कीमतें राज्य सरकारें तय किया करती थीं। सरकार ने इस अध्यादेश के जरिए देश भर में गóो की कीमत 129.84 रुपये प्रति क्विं टल तय कर दी है। गन्ना किसान चाहते हैं कि उन्हें कम से कम इसकी कीमत 280 रुपये प्रति क्विं टल मिले। भाकियू ने पहले ही यह घोषणा कर रखी है कि किसान किसी भी हालत में सरकारी कीमत पर अपना गन्ना नहीं देगा, चाहे उसे गóो में आग ही क्यों न लगानी पड़े।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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