अमेरिका को परमाणु समझौते से जुड़े मसले निपटने की आशा
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को अमली जामा पहनाने के लिए जरूरी कदमों के बारे में पूछने पर रोमर ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हमें पूरा यकीन है कि ये मसले जल्द सुलझ जाएंगे। हम जी-जान से कोशिश कर रहे हैं।"
अमेरिकी राजदूत ने असैन्य उत्तरदायित्व कानून के रूप में तीन कदमों की पहचान की, जिन्हें भारतीय संसद जल्द उठा सकती है। इनमें भारत के साथ कारोबार करने के लिए अमेरिकी कंपनियों को लाइसेंस देना, उचित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के जरिए भारत को खर्च हो चुके ईंधन के पुनप्र्रसंस्कारण के योग्य बनाने वाला करार शामिल है।
भारत के साथ परमाणु व्यापार को संभव बनाने के लिए ओबामा प्रशासन के लिए जरूरी है कि भारत सरकार अमेरिकी परमाणु कंपनियों को भरोसा दिलाए कि परमाणु उपकरणों का दुरूपयोग या प्रसार नहीं होगा।
रोमर ने कहा, "हमने इन सभी क्षेत्रों में काफी प्रगति की है।"
परमाणु करार के बारे में ओबामा प्रशासन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए रोमर ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौता द्विपक्षीय संबंधों में व्यापक विश्वास और भरोसा लाया है। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए फायदेमंद करार दिया।
रोमर ने कहा, "वाशिंगटन में आप दोनों नेताओं के बीच इसी तरह की बातचीत देखेंगे।" उन्होंने कहा कि वे इस बारे में विचार-विमर्श करेंगे कि कैसे इन मसलों को सुलझाकर इस ऐतिहासिक समझौते को अमल में लाया जाए।
मनमोहन सिंह शनिवार को चार दिन की अमेरिका यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। ओबामा के राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद किसी विदेशी शासनाध्यक्ष की यह प्रथम आधिकारिक यात्रा है। इस दौरान आतंकवाद के मुकाबले और जलवायु परिवर्तन से लेकर ऊर्जा तथा खाद्य सुरक्षा तक विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए रणनीतिक भागीदारी का एक नया प्रारूप उजागर होगा।
दोनों देशों ने 123 द्विपक्षीय असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जो भारत को तीन दशक के अंतराल के बाद असैन्य परमाणु उपकरण और ईंधन आयात करने में सक्षम बनाएगा।
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद स्थिति है। परमाणु करार के अमल में आने के बाद दोनों देश एक मसले से चार या पांच बड़े वैश्विक मसलों पर आगे बढ़ने में सक्षम होंगे।
उन्होंने आतंकवाद से मुकाबला करने, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, हरित प्रौद्योगिकी और गरीबी उन्मूलन को मुख्य वैश्विक चुनौतियां करार दिया जो दोनों देशों को व्यापक रणनीतिक भागीदारी में एकसाथ लाएंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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