कैदियों के हृदय परिवर्तन के लिए गो माता का सहारा!
जेल में सजा काट रहे कैदियों में सकारात्मक लाने के लिए बरेली जेल प्रशासन कुछ ही दिनों में यह अनोखा प्रयोग शुरू कर देगा।
बरेली सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक बी.आर.वर्मा ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, "वेदों और पुराणों में गाय के मातृरूप का उल्लेख मिलता है और गाय को मां का दर्जा दिया गया है। यहीं से हमें ऐसा करने का विचार आया।"
वर्मा ने कहा, "जैसा कि हमारी धार्मिक मान्यता है कि गोसेवा से मोक्ष की प्राप्ति और विकृतियों का विनाश होता है। हमें उम्मीद है कि गोसेवा से कैदियों का हृदय परिवर्तन होगा। उनमें सकारात्मक सोच आएगी और उनका आचरण बदलेगा।"
इस खास प्रयोग को लागू करने के लिए जेल प्रशासन द्वारा हाल ही में पंजाब से 2 लाख रुपये मूल्य की 9 गायें खरीदकर लाई गईं हैं।
अधिकारियों के मुताबिक बरेली सेंट्रल जेल में फिलहाल 3,000 कैदी हैं, जो हत्या व अन्य जघन्य मामलों में सजा काट रहे हैं। इसमें से हिंदू कैदियों की संख्या 90 फीसदी है।
वर्मा ने कहा कि जैसा कि कैदियों की संख्या गायों से कहीं अधिक है। इसिलए गोसेवा को सुचारू रूप से लागू करने के हमने कैदियों के अलग-अलग समूह बनाएं हैं, जो बारी-बारी से गोसेवा कर सकेंगे। ज्यादातर कैदियों ने स्वेच्छा से गोसेवा की इच्छा जाहिर की है।
बरेली जेल प्रशासन ने राज्य की कई दूसरी जेल के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस अनूठे प्रयोग को शुरू करने की सलाह दी है। अधिकारियों का मानना है कि क्योंकि गोसेवा का जुड़ाव धार्मिक है। इसिलए यह कदम कैदियों का आचरण सुधारने में मददगार साबित हो सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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