विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करने की व्यवस्था मौजूद : मुखर्जी (लीड-1)

नई दिल्ली, 18 नवंबर (आईएएनएस)। इस वर्ष अब तक देश में 15 अरब डॉलर के विदेशी धन आने और रुपये की मजबूत होती स्थिति के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि विदेशी धन के प्रवाह में किसी अनियमितता का पता लगाने और उसे रोकने के लिए सरकार के पास सक्षम तंत्र हैं।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में विदेशी संस्थागत निवेशकों से भारी मात्र में देश में धन आने के बारे में पूछे गए एक सवाल पर मुखर्जी ने कहा, "यह चिंता का मामला नहीं है। विदेशी धन के प्रवाह की निगरानी के लिए हमारे पास एक तंत्र मौजूद है।"

वित्त मंत्री ने कहा, "जब भी हम इसमें कुछ खराबी पाते हैं, उसे दूर करने के प्रबंध किए जाते हैं।"

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष देश के शेयर बाजार में विदेशी कोष का प्रवाह 15.142 अरब डॉलर था।

इस वर्ष विदेशी धन के अधिक आगमन से भारतीय रुपये में मजबूती आई है जो निर्यातकों और नीति निर्माताओं के लिए परेशानी का कारण है। निर्यातक इस बात से नाखुश हैं कि रुपये की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक बाजार में भारतीय सामानों की कीमत बढ़ रही है। उधर नीति निर्माता मुद्रास्फीति बढ़ने के प्रभाव के प्रति चिंतित हैं।

एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने विदेशी फंडों पर कर लगाने और नियमों में सुधार का प्रस्ताव किया है। बड़े पैमाने पर विदेशी फंडों का आना भारतीय रिजर्व बैंक सहित नीति निर्माताओं के लिए चिंता का कारण है।

एसोचैम ने कहा कि ब्राजील की तरह विदेशी संस्थागत निवेशकों पर दो प्रतिशत का कर लगाया जाना चाहिए, जिससे मुद्रा बाजार में संतुलन कायम रखा जा सके और भारत में वर्ष 2007 की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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